भैंसासुर में झोलाछाप डॉक्टर पर नहीं हुई कार्यवाही — जनसुनवाई के बाद भी विभाग मौन, ग्रामीणों में आक्रोश
सतना जबलपुर दर्पण । मैहर तहसील के ग्राम भैंसासुर में झोलाछाप डॉक्टर पर अब तक कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने दिनांक 04 नवंबर 2025 को कलेक्टर मैहर की जनसुनवाई में बाकायदा आवेदन देकर कमलेश त्रिपाठी नामक झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कार्यवाही की मांग की थी। लेकिन आज तक विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि जनसुनवाई में आवेदन देने के बाद आमतौर पर विभाग तुरंत हरकत में आता है, पर इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी संदिग्ध और गैरजिम्मेदाराना है। आरोप है कि संबंधित अधिकारी मामले को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल रहे हैं।
अब ग्रामीणों ने सोशल मीडिया के माध्यम से कलेक्टर मैहर से सीधी गुहार लगाई है — अगर उक्त झोलाछाप डॉक्टर को वैध माना जा रहा है, तो किन मापदंडों के आधार पर उसका क्लिनिक मान्य है, यह जानकारी शिकायतकर्ताओं को सार्वजनिक की जाए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि विभाग झोलाछाप डॉक्टर को बचाने में लगा है, तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग कलेक्टर जैसे जिले के सर्वोच्च अधिकारी को भी भ्रमित करने में जुटा है, ताकि झोलाछाप डॉक्टर को संरक्षण दिया जा सके। सवाल उठता है — क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में है? क्या कार्यवाही केवल तब होगी जब कोई अनहोनी घटे? जनता का विश्वास तब टूटता है जब गलत को सही ठहराने की कोशिश होती है।भैंसासुर के लोग अब प्रशासन से केवल एक ही मांग कर रहे हैं — या तो निष्पक्ष जांच कर कार्यवाही कीजिए, या स्पष्ट कर दीजिए कि झोलाछाप डॉक्टर चलाने की वैध अनुमति जिले में खुलकर दी जा चुकी है!



