बरही पुलिस की शर्मनाक कार्यवाही, बलात्कार पीड़िता को धमकाकर दर्ज कराया साधारण मारपीट का मामला

कटनी जबलपुर दर्पण । जिले के बरही थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। ग्राम गैरतलाई निवासी एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसके साथ दुष्कर्म की घटना को पुलिस ने दबाने का प्रयास किया और उसे धमकाकर साधारण मारपीट का मामला दर्ज कराया गया।
पीड़ित महिला के अनुसार, 5 जनवरी को वह सब्जी बेचने ग्राम गई थी। इसी दौरान ग्राम का ही निवासी वकील चौधरी नामक युवक उसे जबरन घसीटते हुए अपनी जीप में बैठाकर शासकीय भूमि पर बने अपने आवास पर ले गया। महिला का आरोप है कि आरोपी ने सब्जी की टोकनी से चाकू निकालकर उसे धमकाया और उसके साथ बलात्कार किया। महिला ने बताया कि घटना के दौरान उसके पैर खाट से बांध दिए गए थे।
महिला के मुताबिक, करीब आधे घंटे बाद जब उसे छोड़ा गया तो रास्ते में एक व्यक्ति मिला, जिसे देखकर उसने चिल्लाकर मदद मांगी और आरोपी को रोकने की बात कही। उसी व्यक्ति की सलाह पर वह ग्राम पंचायत पहुंची, जहां सरपंच ने पुलिस को सूचना दी।
पीड़िता का आरोप है कि पुलिस मौके पर तो पहुंची, लेकिन वहां से उसकी टोकनी, तराजू, चाकू सहित कोई भी साक्ष्य अपने कब्जे में नहीं लिया और वापस लौट गई। महिला का कहना है कि आरोपी प्रभावशाली है, इसी कारण पुलिस ने थाने बुलाकर उसे डराया और कहा कि दुष्कर्म की शिकायत करने से बदनामी होगी, इसलिए केवल मारपीट का मामला दर्ज कराओ। इसी दौरान पुलिस ने महिला का वीडियो भी बना लिया, जिसे बाद में वरिष्ठ अधिकारियों को भेजकर अपने बचाव का प्रयास किया गया।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि जब उसे महिला थाने भेजा गया, वहां भी उसके साथ संवेदनहीन व्यवहार किया गया। महिला थाना प्रभारी द्वारा कथित तौर पर कहा गया कि दुष्कर्म की शिकायत करने से परिवार की बदनामी होगी। हैरानी की बात यह है कि महिला का मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया गया, जबकि उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान हैं। महिला का कहना है कि आरोपी ने उसकी जांघ और सीने पर दांत से काटा था।
पीड़िता पिछले दो दिनों से पुलिस अधीक्षक से मिलने के लिए भटकती रही। सोमवार को वह सीएसपी नेहा पच्चीसिया के पास पहुंची, जहां उसने अपनी आपबीती बताई। सीएसपी द्वारा मामले की गंभीरता से एसपी को अवगत कराए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक ने धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराने का भरोसा दिलाया है।
मामले ने एक बार फिर पुलिस की संवेदनशीलता और महिला अपराधों में अपनाई जा रही कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।



