दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का शुभारंभ,

जबलपुर दर्पण । प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, महाकोशल महाविद्यालय, जबलपुर के तत्वावधान में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी “भारतीय दर्शन और योगः एक शारीरिक और मानसिक अनुशासन” का आयोजन 14 एवं 15 मार्च 2026 को किया जा रहा है। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में हिंदी ग्रंथ अकादमी, भोपाल के संचालक डॉ. अशोक कडेल ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. अनिल करवन्डे (नागपुर), विशिष्ट अतिथि डॉ. केशव सिंह (ग्वालियर) तथा डॉ. पूनम कौशिक (इंदौर) उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ सभी अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के पूजन के साथ किया गया। अतिथियों का स्वागत नन्हे पौधे एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया।
संगोष्ठी संयोजक डॉ. ज्योति जुनगरे ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम की उद्देश्यपूर्ण जानकारी दी।
मुख्य अतिथि डॉ. अशोक कडेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय दर्शन में योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का विज्ञान है। ऋग्वेद से लेकर उपनिषदों और पतंजलि तक हमारे ऋषियों ने स्पष्ट कहा है कि मन का अनुशासन ही मानव उत्कर्ष का मार्ग है। आज जब पूरा विश्व मानसिक तनाव और असंतुलन से जूझ रहा है, तब भारतीय योग परंपरा मानवता को संतुलन, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक जागृति का मार्ग प्रदान करती है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. केशव सिंह ने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है और यही जीवन में संतुलन बनाए रखता है। डॉ. पूनम कौशिक ने योग से होने वाले शारीरिक एवं मानसिक लाभों की विस्तृत जानकारी दी। वहीं मुख्य वक्ता डॉ. अनिल करवन्डे ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में योग और दर्शन का गहरा संबंध है, जो मानव जीवन को संतुलित और सार्थक बनाता है।
संगोष्ठी में नीदरलैंड से डॉ. रितु शर्मा नंदन पाण्डे ऑनलाइन माध्यम से जुड़ीं। उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि भारतीय दर्शन मानव जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने की महत्वपूर्ण पद्धति है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में योग के महत्व पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी समन्वयक प्रो. अरुण शुक्ल ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रविश तमन्ना ताजिर एवं डॉ. संघप्रिया तिवारी ने किया।
संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. संदीप अवस्थी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े और उन्होंने पतंजलि के योग दर्शन की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की। इस सत्र में डॉ. नेहा दवे, डॉ. प्रीति पाण्डे, डॉ. संदीप यादव, डॉ. ममता गुप्ता, डॉ. स्वाति, डॉ. नेहा शाक्य एवं डॉ. श्रुति चतुर्वेदी द्वारा शोध पत्रों का वाचन किया गया।
संगोष्ठी में डॉ. राजेन्द्र सिंह राजपूत, डॉ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव, डॉ. आर.के. श्रीवास्तव, डॉ. डी.के. मिश्रा, डॉ. हेमंत तनकंपन, डॉ. राजीव मिश्रा, डॉ. राजेश शामकुंवर, डॉ. मलय वर्मा, डॉ. शिवचंद्र वल्के, डॉ. शुभांगी धगट, डॉ. जयराम सिंह एवं डॉ. रामेश्वर झारिया सहित लगभग 194 प्राध्यापक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।


