गोंडी चित्रकला को मिला डिजिटल बाजार का नया मंच, वैश्विक पहचान की ओर बढ़े कलाकार

डिंडौरी, जबलपुर दर्पण न्यूज। मध्यप्रदेश शासन के निर्देशन में जिला प्रशासन द्वारा शुक्रवार को कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम हॉल में गोंडी चित्रकला कलाकारों के लिए ई-कॉमर्स मंच के शुभारंभ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से पाटनगढ़ की विश्व प्रसिद्ध गोंडी चित्रकला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़़ने की नई पहल की गई। जनजातीय कला, संस्कृति एवं कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में डिण्डौरी जिले ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं राज्य मंत्री राधा सिंह द्वारा वर्चुअल रिमोट का बटन दवा कर गोंडी चित्रकला आधारित उत्पादों के लिए ई-कॉमर्स मंच का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर आजीविका ग्राम संगठन, पाटनगढ़ एवं डॉट्स एंड डैशेज संस्था के मध्य गोंडी चित्रकला संवर्धन, कलाकार आजीविका उन्नयन एवं विपणन सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। जिला पंचायत डिण्डौरी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी, मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी हर्षिका सिंह, अमेज़न कारीगर टीम के प्रतिनिधि भी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत, माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गया। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश शासन के राज्यमंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती राधा सिंह, कैबिनेट मंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग प्रहलाद पटेल, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे, जिला पंचायत अध्यक्ष रूद्रेश परस्ते, प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति मोर्चा पंकज सिंह तेकाम, जिला अध्यक्ष चमरू सिंह नेताम, जनपद अध्यक्ष करंजिया राजू सिंह उद्दे, जिला सदस्य हीरा रूद्रेश परस्ते, पूर्व जिला अध्यक्ष नरेन्द्र राजपूत, श्री सुधीरदत्त तिवारी, आशीष वैश्य, आकाश नामदेव, जय सिंह मरावी, हरिहर पाराशर, एके नागेश प्रशासनिक अधिकारी से अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग दिपाली रस्तोगी, कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया, सीईओ जिला पंचायत दिव्यांशु चौधरी, एसडीएम शहपुरा ऐश्वर्य वर्मा, एसडीएम डिंडौरी भारती मेरावी, अतिरिक्त सीईओ जिला पंचायत पंकज जैन, एनआरएलएम प्रबंधक अर्पणा पाण्डेय, जनपद सीईओ डिंडौरी पंकज देवड़ा, रामजीवन वर्मा, जेठूलाल पट्टा, राजेश पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे। इस अवसर पर स्थानीय गोंडी कलाकारों द्वारा आकर्षक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कलाकार सुश्री चम्पी श्याम, आसमा तेकाम सहित अन्य चित्रकारों ने कैनवास, पेपर शीट, टी-शर्ट, शर्ट, साड़ी, दुपट्टा, रूमाल और अन्य उत्पादों पर उकेरी गई गोंडी कला की लगभग 30 कलाकृतियों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में पारंपरिक जनजातीय संस्कृति, प्रकृति और लोकजीवन की झलक देखने को मिली।
प्रकृति के साथ लोकजीवन की अनोखी झलक।
अपने उद्बोधन में प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि ’’वोकल फॉर लोकल’’ और ’’आत्मनिर्भर भारत’’के संकल्प को साकार करने में स्थानीय कला की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि पाटनगढ़ की गोंडी चित्रकला को ई-कॉमर्स मंच से जोड़ना कलाकारों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा। राधा सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार स्व-सहायता समूहों, ग्रामीण महिलाओं एवं कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गोंडी चित्रकला आधारित उत्पादों का डिजिटल विपणन कलाकारों की आय वृद्धि एवं सांस्कृतिक संरक्षण दोनों में सहायक सिद्ध होगा। विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने अपने संबोधन में कहा कि पाटनगढ़ की गोंडी चित्रकला केवल डिंडौरी जिले ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर है। यह कला गोंड समाज की परंपराओं, संस्कृति, प्रकृति प्रेम और जीवन मूल्यों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि वर्षों से गोंडी कलाकार सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी कला को संरक्षित किए हुए हैं, जिसके कारण आज पाटनगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स मंच के शुभारंभ से स्थानीय कलाकारों को अपनी कलाकृतियों के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध होगा। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और कलाकारों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल कलाकारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को भी अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने कहा कि पाटनगढ़ की कला केवल चित्र नहीं, बल्कि गोंड समुदाय की संस्कृति, इतिहास, प्रकृति और जीवन दर्शन की जीवंत अभिव्यक्ति है। करंजिया विकासखंड का पाटनगढ़ ग्राम देश और दुनिया में गोंडी चित्रकला के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित है, जहां 157 परिवार प्रत्यक्ष रूप से चित्रकला गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि गोंडी चित्रकला गोंड जनजाति की सांस्कृतिक चेतना, लोककथाओं और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है। बिंदुओं, रेखाओं और विशिष्ट पैटर्न से निर्मित यह कला प्रकृति और मानव के सह-अस्तित्व का संदेश देती है। अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री पंकज सिंह तेकाम ने कहा कि ई-कॉमर्स मंच का शुभारंभ गोंडी कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण, कला संरक्षण और बाजार विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे गोंडी चित्रकला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। जिला पंचायत अध्यक्ष रूद्रेश परस्ते ने कहा कि यह पहल कलाकारों की आय वृद्धि, महिला सशक्तिकरण, पारंपरिक कला संरक्षण तथा ग्रामीण उद्यमिता विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। यह मॉडल कला आधारित आजीविका संवर्धन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था के विकास का सफल उदाहरण बनेगा। कार्यक्रम में गोंडी कलाकार सुश्री सुषमा श्याम एवं श्री सुनील श्याम ने गोंडी चित्रकला की परंपरा एवं महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं डॉट्स एंड डैशेज संस्था के प्रतिनिधि श्री पार्थ पाठक ने ई-कॉमर्स मंच की कार्यप्रणाली एवं विपणन रणनीति की जानकारी दी। कार्यक्रम में बताया गया कि डॉट्स एंड डैशेज संस्था के सहयोग से पाटनगढ़ के कलाकार परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां पहले एक परिवार की औसत वार्षिक आय 35 से 40 हजार रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 60 हजार से 2.70 लाख रुपये तक पहुंच गई है। बाजार विस्तार और ऑनलाइन बिक्री के माध्यम से आने वाले समय में कलाकारों की आय में और अधिक वृद्धि की संभावना जताई गई। नई व्यवस्था के तहत गोंडी चित्रकला आधारित उत्पादों को अमेजन कारीगर सहित विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध किया जाएगा। इससे पाटनगढ़ की कला को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।



