कांग्रेस में कलह की आहट

राजकुमार ठाकुर सिवनी।
भोपाल। मध्यप्रदेश की 24 विधानसभा पर आने वाले दिनों में होने वाले उपचुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस में अंतर्कलह का कोलाहल सुनाई देने लगा है। कांग्रेस की सियासत में कमलनाथ कोटरी के क्षत्रप एनपी प्रजापति और सज्जन सिंह वर्मा की जोड़ी कांग्रेस को कैप्चर करने में जुट गई है। क्षेत्रीय और संघर्षशील नेताओं की अनदेखी कर बाहरी नेताओं अधिक तरजीह दी जा रही है। यही नहीं दिग्विजय सिंह को दरकिनार के साथ ठाकुर क्षत्रपों को पार्टी फैसलों में तवज्जो नहीं दी जा रही हैं। बताते हैं कि नाथ कोटरी के फैसलों लेकर अजय सिंह (राहुल भैया) पहले ही विरोध जता चुके हैं। अब खबर है कि दिग्विजय के खास एवं ग्वालियर-चंबल संभाग के कद्दावर नेता गोविन्द सिंह उपचुनाव के मद्देनजर पार्टी में तवज्जो नहीं मिलने से खफा होकर अपनेे समर्थकों के साथ पार्टी से बगावत कर सकते हैं।
दरअसल, पीसीसी चीफ कमलनाथ मध्यप्रदेश की सत्ता खो देने के बाद अब प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत के सहारे दोबारा सत्ता में लौटने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को किनारा करने के साथ उनके खास कहे जाने वाले ठाकुर क्षत्रपों को दूर करना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि पूरी कांग्रेस के पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी को हाशिए पर रखते हुए विधायक एनपी प्रजापति और विधायक सज्जन सिंह वर्मा कांग्रेस को संचालित करने में लगे हैं। प्रजापति- वर्मा की जोड़ी ने तेजी से उभरते प्रदेश अध्यक्ष के रॉ मटेरियल एवं मीडिया विभाग के अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी हाशिए पर धकेलने की कोशिश शुरू हो गई है। प्रजापति- वर्मा द्वारा लिए जा रहे निर्णय उसे कांग्रेस में बगावत के आसार दिखाई देने लगे हैं।
दिग्विजय के क्षत्रपों को किया दरकिनार
ग्वालियर चंबल संभाग में सिंधिया राजघराने का प्रभुत्व होने के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपना नेटवर्क स्थापित किया। सिंधिया के खिलाफ कांग्रेस एक नया धड़ा तैयार किया। इसकी अगुवाई साहब सिंह गुर्जर, केपी सिंह अशोक सिंह, भगवान सिंह यादव और गोविन्दसिंह जैसे नेता कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और उनके सिपहसालारों ने क्षेत्रीय क्षत्रपों को दरकिनार कर बाहरी नेताओं को उप चुनाव जिताने की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है. मसलन विधायक नीरज दीक्षित, विधायक आरिफ मसूद जैसे नेताओं को ग्वालियर चंबल संभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिन्हें इस क्षेत्र का राजनीतिक और भौगोलिक ज्ञान नहीं है. मुरैना से लेकर एंड तक डा.गोविंद सिंह का अपना जनाधार है. डॉक्टर सिंह मुरैना संसदीय क्षेत्र से चुनाव भी लड़ चुके हैं. इसी प्रकार शिवपुरी से लेकर गुना तक केपी सिंह कक्काजू का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है. केपी सिंह छात्र राजनीति से ही महल विरोधी नेता माने जाते रहे. यही नहीं, जीवाजी विश्वविद्यालय में उन्होंने अपनी राजनीति का लोहा मनवाया और इंडिया समर्थक छात्र नेताओं को पटखनी देते रहें.
इसलिए भी नाराज हैं गोविन्द सिंह
सात बार के विधायक रह चुके डॉ गोविंद सिंह का नाम नेता प्रतिपक्ष के लिए तेजी से उभरा था, लेकिन कमलनाथ ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के विरोध के चलते कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने दिल्ली के प्रभावशाली नेता अहमद पटेल से आग्रह कर डॉ सिंह का नाम नेता प्रतिपक्ष के दावेदारों की सूची से हटा दिया और अब वे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति को मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष बनाना चाहते हैं। बताते हैं कि इस वजह से भी गोविन्द सिंह नाराज हैं और कहा जा रहा है कि अपनी टीम के साथ कांग्रेस से कभी भी बगावत कर सकते हैं।
और भी श्रीमंत समर्थक छोड़ सकते हैं कांग्रेस
पूर्व सांसद श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया उपचुनाव के पहले कांग्रेस को एक और झटका दे सकते हैं। सिंधिया 19 जून को भोपाल आ रहे हैं और वे अपने समर्थकों का शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार उपचुनाव में टिकट बंटवारे के बाद कांग्रेस के पूर्व विधायक सहित दो जिला अध्यक्ष समेत कई पदाधिकारी कांग्रेस को छोड़ भाजपा का दामन थाम सकते हैं। सूत्रों पर भरोसा करें तो कांग्रेस में विदिशा एपिसोड की पुनरावृत्ति हो सकती है।



