उपचुनाव परिणाम के साथ विंध्य प्रदेश में कांग्रेस कर रही है बड़ी घुसपैठ की तैयारी

चारों खाने चित हो सकती है भाजपा, असंतुष्ट विधायकों पर डाल रहे हैं डोरे
मुकेश चतुर्वेदी, रीवा। मध्य प्रदेश की राजनीति अनिश्चितताओं के बीच लगातार गोते खा रही है, भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राजनीतिक दलों का भविष्य उपचुनाव के परिणाम पर पूरी तरह से टिका हुआ है। चूंकि भाजपा को इलेक्शन मैनेजमेंट का बादशाह माना जाता है और वह भी ईवीएम मशीन के मामले में इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भाजपा अध्यक्ष बीडी शर्मा अपनी जीत के लिए पूरी तरह से आश्वस्त नजर आ रहे हैं खैर उपचुनाव के परिणाम क्या होंगे यह तो 10 नवंबर को होने वाली मतगणना के दौरान अपने आप स्पष्ट हो जाएगा , इसी बीच मध्य प्रदेश की राजनीति को और सर गर्म करने के लिए विंध्य प्रदेश से ताजातरीन जानकारी यह निकल के आ रही है कि जहां भाजपा ने उपचुनाव में बड़ी जीत को सेलिब्रेट करने की तैयारी कर रखी है वहीं कांग्रेस पार्टी इसी खुशी के मौसम में भाजपा सरकार को जोरदार झटका देने के लिए विंध्य प्रदेश के विधायकों के बीच मजबूत घुसपैठ करने में सफल हो गई है। यह माना जा रहा है की भाजपा के एक जनाधार वाले नेता के साथ कम से कम 10 विधायक भगवा को हमेशा के लिए अलविदा कह सकते हैं यदि ऐसा होता है तो भाजपा सरकार के लिए मुसीबतें और भी बढ़ जाएंगी क्योंकि एक बार फिर मध्य प्रदेश में उपचुनाव कराने पड़ेंगे। यह सही है कि मौजूदा समय में भारतीय जनता पार्टी का चुनावी मैनेजमेंट सबसे कारगर साबित हो रहा है यह बात और है कि देश के बिहार में भाजपा की विदाई नजर आने लगी है लेकिन अन्य जगह भाजपा का आलाकमान पूरी ताकत के साथ अपनी सरकार को स्थापित करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है। भाजपा सरकार चौथी बार सत्ता के सिंहासन पर कैसे काबिल हुई है शायद यह बताने की आवश्यकता लोगों को नहीं है क्योंकि सभी जानते हैं कि ग्वालियर राजघराने ने एक बार फिर अपने इतिहास को दोहराते हुए कांग्रेस की बनी बनाई सरकार को गिरा कर भाजपा को सत्ता के सिंहासन पर काबिज करा दिया है। इसी वजह से मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के अंतर्गत बीते 3 नवंबर को मतदान कराया गया है जिसका परिणाम 10 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव के साथ घोषित किया जाएगा। भाजपा उपचुनाव में अपनी जीत को लेकर पूरी तरह से टेंशन फ्री चल रही है, लेकिन उसे इस बात का अहसास नहीं है कि कांग्रेस उसे बच्चा देने की तैयारी कर चुकी है। विंध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के ऐसे कई सीनियर विधायक हैं जो लगातार चुनाव जीत रहे हैं उसके बाद भी भाजपा ने उन्हें सरकार में शामिल होने का अवसर अब तक प्रदान नहीं किया।
उलटफेर करने में माहिर है कांग्रेस, बड़े दांव की आहट
देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस का भले ही बुरा दौर चल रहा हो पर भारतीय राजनीति में मास्टरमाइंड तरीके से अपने आप को स्थापित करना कांग्रेस पार्टी के पुराने नेताओं को अच्छी तरह आता है। संभावना जताई जा रही है की विंध्य प्रदेश मैं भारतीय जनता पार्टी को टेकओवर करने के बाद जिन सीनियर विधायकों की अवहेलना लगातार की गई है उन्हें कांग्रेसी खेमे में लाने की बराबर तैयारी हो गई। विंध्य प्रदेश के सतना और रीवा जिले के भाजपा विधायक सत्ता के बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी को अपने तमाम विधायकों पर पूरा भरोसा है कि वे किसी भी स्थिति में पाला नहीं बदलेंगे। लेकिन राजनीति में उठापटक का दौर कभी थमता नहीं है। कांग्रेसी नेता भी भाजपा की तरह उलटफेर करने के लिए जाने जाते हैं। अब देखना यह है जब 10 नवंबर को मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर हुए उप चुनाव के मतदान पर आधारित मतगणना के क्या परिणाम सामने आते हैं और उस दौरान विंध्य प्रदेश के वे 10 विधायक क्या फैसला लेते हैं जिनके कांग्रेस में जाने की संभावना है लगभग प्रबल हो चुकी है।



