बालाघाट दर्पणमध्य प्रदेश

डोंगरगांव गुप्तेश्वर धाम में हुई बैठक,रोमांच से भर देने वाले रहस्यमयी शिव धाम की देखी महिमा,भारत विकास परिषद की नई शाखा के गठन और विकास को लेकर हुई चर्चा

बालाघाट। सतपुड़ा के घने वनों से घिरे बालाघाट जिले की सुरमई वादियों में पर्यटन और दार्शनिक स्थलों की कमी नही है कमी है तो बस जिले में पर्यटन और दार्शनिक स्थलों के विकास की,बालाघाट जिले के लोग वर्षो से पर्यटन के क्षेत्र में विकास के लिए टकटकी लगाए हुए है ताकि यंहा रोजगार के अवसर पैदा हो लेकिन दुर्भाग्य है कि इस दिशा में जिम्मेदारों ने वादों की बौछार तो की लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। बालाघाट जिले में पर्यटन की अपार संभावनाओं को भांपते हुए भारत विकास परिषद की इकाई इस दिशा में स्थानीय लोगो के साथ कदमताल होकर कार्य करने के लिए कमर कसे हुए है जिसके चलते 14 फरवरी को भारत विकास परिषद के प्रांतीय संयोजक आलोक मिश्रा ने पर्यटन को लेकर जंहा बालाघाट के पत्रकारों से चर्चा की वंही बालाघाट के धरातलीय रहस्यमयी शिव धाम डोंगरगांव में जाकर आवश्यक बैठक भी ली।
बालाघाट से लगभग 35 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत डोंगरगांव में स्थित गुप्तेश्वर महादेव के धाम में भारत विकास परिषद के पदाधिकारी, नगर के व्यापारी पत्रकार और ग्रामीण जन भी पंहुचे बैठक में ग्रामीणों और स्थानीय सरपंचों के साथ भारत विकास परिषद के नवीन गठन को लेकर चर्चा की गई ।साथ ही गुप्तेश्वर महादेव के धाम के विकास को लेकर भी चर्चा की गई जिसमें भारत विकास परिषद के प्रांतीय संयोजक आलोक मिश्रा ने कहा कि यह शिव धाम आपने आप मे अनेक रहस्य और रोमांच के साथ आस्था का गहरा असर लेकर मौजूद है और यंहा विकास होना बहुत ही आवश्यक है ताकि स्थानीय लोगो के लिए रोजगार के अवसर बन सके साथ ही स्थानीय रोजगार की अन्य संभावनाओं को लेकर गुप्तेश्वर महादेव धाम का विकास किया जाएगा।यंहा श्री मिश्रा ने कहा कि डोंगरगांव गुप्तेश्वर धाम पंहुच मार्ग और विकास कार्यो के लिए वन विभाग के एन ओ सी की समस्या को सबसे पहले हल किया जाएगा साथ ही स्थानीय नवीन भारत विकास परिषद की प्रक्रियाओं के तहत प्रोजेक्ट बनाकर गुप्तेश्वर धाम के लिए बजट प्रदान किया जाएगा।
यंहा भारत विकास परिषद से नागरमल अग्रवाल,डॉ नीरज अरोरा,मुरली मनोहर श्रीवास्तव,प्रकाशचंद बागरेचा,पत्रकार हरीश लिल्हारे,इंजीनियर भुवन उपवंशी,मंडल अध्यक्ष भाजपा पवन पारधी,स्थानीय सरपंचों व अन्य ग्रामीणों ने भी स्थानीय क्षेत्र के कई गांव के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए पर्यटन और दार्शनिक क्षेत्रो के विकास की सम्भावनाओ को उजागर किये साथ ही गुप्तेश्वर धाम में रहस्यमयी पत्थरों की गुफा और सुरंगों में भक्तो के लिए सुगम रास्ते बनाने के लिए अपने अपने अनुभव बताये।
बता दे कि डोंगरगांव में प्राचीन समय से स्थित गुप्तेश्वर महादेव का धाम चट्टानों पत्थरो की गहरी गुफा और सुरंगों में मौजूद है जंहा धरातल में गुप्तेश्वर महादेव के धाम में जाने के लिए भक्तो को बड़ी मशक्कत करके 7 सौ फीट नीचे जाना पड़ता है यंहा ग्रामीण भक्तो की माने तो गुप्तेश्वर धाम के आगे शेषनाग धाम,और जमीन के नीचे ही जलधारा के अलावा मैदान होने का दावा किया गया है।धरातल में प्राकृतिक चट्टान मंदिर में स्थित गुप्तेश्वर महादेव के धाम पंहुचने से पूर्व पत्थरो की चट्टान में अद्भुद कलाकृति अलग ही तौर पर कभी न भूलने वाले शिव लोक के दर्शन होते है।
गुप्तेश्वर धाम में बैठक से पूर्व यंहा पंहुचे भारत विकास परिषद के दल ने पत्थरो की गुफा में प्रवेश कर यंहा माँ जगदम्बे के धाम में पूजा अर्चना की साथ ही पत्थरों की तंग गुफा और रोमांच से भर देने वाले सुरंगों का अवलोकन भी किये यहाँ शिव धाम की महिमा देखकर परिषद से जुड़े पदाधिकारी भी दंग रह गए उन्होंने यंहा विशेष तौर पर विकास करने का संकल्प लिए।
बैठक में राजेश जैन,डोंगर गांव सरपंच श्यामलाल मड़ावी,राम सिंह पन्द्रे,इंजीनियर भुवन उर्फ बाबा उपवंशी,पत्रकार हरीश लिल्हारे, गणेश अग्रवाल,राजेश अग्रवाल, अशोक कांकरिया,संजय अजित,पत्रकार मानक नागेश्वर,पुष्प सलामे, फूलचंद गुरबेले,प्रदीप गुप्ता,कमल सिंह मर्सकोले,अशोक पन्द्रे,प्रदीप उईके, योगेश्वर सोनवाने सहित बड़ी संख्या में भारत विकास परिषद के पदाधिकारी और ग्रामीण जन मौजूद रहे।

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