पानी की तरह बहाया पैसा लेकिन नहीं बुझा पाये ग्रामीणों की प्यास

दूर दराज जंगली नालों के पानी से प्यास बुझाने मजबूर ग्रामवासी

मड़ियादो । चाहे कितने भी सितम कर लो, कितने भी जुल्म कर लो, तो कहीं आप किसी का सर कलम कर दो या फिर कोई और सजा दे दो लेकिन यदि किसी से यह कह दो कि तुम्हें प्यासा ही रहना पड़ेगा तो इस सजा को कोई भी आदमी जहर खाकर मरने से बदतर समझेगा लेकिन यह आज हकीकत है कि दमोह जिले के हटा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मडियादो में ग्रामीण कई आसानी से प्यास बुझाने के लिए महीनों और सालों से प्यासे हैं। गांव से टंकी की दूरी महज 100 मीटर की है, परंतु कई महीनों से उस पानी की टंकी का पानी ग्रामीणों के गले नहीं उतरा। कई सालों से आज भी मड़ियादौ ग्रामवासी मीलों दूर से प्यास बुझाने के लिए पानी लाते हैं। गर्मियों में पानी की बूंद को पसीने के बदले कई दिनों तक रह जाते हैं। उपतहसील का दर्जा प्राप्त मड़ियादौ पंचायत की अव्यवस्थाओं का एक और मामला सामने आया जब ग्राम मडियादो में रह रहे हजारों ग्रामीण अपनी प्यासी व्यथा एक-एक करके सुनाने लगे। उनका मानना है कि कई बार ग्राम पंचायत के कर्मचारियों को सूचना दी गई। जैसे तैसे बातों को बहला-फुसलाकर आज हो जाएगा, कल हो जाएगा के पुराने ढर्रे के रवैया से बातों को दबा दिया गया और बोलने वालों के मुंह बंद करा दिए गए। जिससे ना तो अब कोई अपनी बात रखता है और ना ही समस्या उजागर हो पाती है। मडियादो में नलजल योजना है लेकिन वह सिर्फ देखने और दिखाने के लिए है। पाइपलाइन के जरिए से एक भी ग्रामीण को ऐसी भीषण गर्मी में पानी की एक भी बूंद नहीं मिल पा रही है। जिससे ग्रामीण बहुत हताश और निराश हो चुके हैं। ग्रामीण प्रतीक्षा में हैं कि इस पाइप लाइन से उनके घर में पानी कैसे प्राप्त होगा, ना तो इस समस्या की ओर प्रशासन द्वारा व्यवस्था की गई है और ना ही अन्य तरीके से पीने के पानी की व्यवस्था का दूसरा उपाय सोचा गया है। पंचायत द्वारा अनेकों बोर कराकर हैंडपंप की व्यवस्था कराई गई जो कि रह-रह कर चलती आई है। आए दिन हैंडपंप खराब हो जाते हैं, जो कि कई दिनों तक सुधारे नहीं जाते हैं। आज भी स्थिति यह है कि बहुत सारे हैंडपंप पानी की जगह सिर्फ हवा उगल रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वह चोपरा, खेतों के ट्यूबवेल और निजी ट्यूबवेल इत्यादि पर आश्रित हैं। जहां से कुछ मात्रा में पानी प्राप्त हो जाता है। ग्रीष्म ऋतु में तापमान बढते ही जंगली नाले सूख जाते है। जिससे विवश होकर ग्रामीणों को दूर-दूर खेतों से पानी लाना पड़ता है। मड़ियादौ हर एक ग्रामीण बच्चों से लेकर वृद्धों की ना तो कोई सुनवाई है और ना ही कोई न्याय हो रहा है। कई साल से लगातार ग्रामीण मीलों दूर चलकर जंगल से पानी का सिलसिला प्यास बुझाने के लिए करते आ रहे हैं। ग्रामीणों की समस्या इतनी अधिक है, जिसका किसी जिम्मेदार व्यक्ति ने कोई भी ध्यान नहीं दिया है और ग्रामीणों ने यदि बात कही भी है तो उनके प्रश्नों के जवाब वही के वही दबा दिए जा चुके हैं। प्रशासन से उम्मीद है कि उनके लिए जल की व्यवस्था की जाए ताकि उनके रहन-सहन और पीने का पानी जैसी आधारभूत समस्याओं का निदान हो सके। ज्ञातव्य हो कि बीते कुछ दिन पूर्व जनप्रतिनिधियों के समक्ष अनेकों ग्रामीणों ने उपस्थित होकर सचिव के विरुद्ध उनके खिलाफ पानी की समस्या को लेकर अपने अंदर की आवाज भी उठाई।



