आत्मग्लानि और आत्ममंथन का अवसर देकर बुझ गई एक मासूम जीवन ज्योति..

नरसिंहपुर। जिसे माता पिता की सुकून भरी गोद नसीब होनी थी उसे भूसे का ढेर नसीब हुआ,जिस मासूम को अधिकार था कि माता पिता से खिलौनों और चौकलेटों के लिए जिद करती वह एक दरिंदे की हैवानी ज़िद के आगे कुछ नही कर पाई,जिसे अधिकार था कि खुले आसमान में उड़ सके,अपनी मेहनत और लगन से कुछ मुकाम हासिल कर माता पिता का नाम रौशन कर सके,वही मासूम सी बेटी एक हैवान के घृणित कृत्य का शिकार हो गई,वह अब कभी नही उड़ पाएगी,क्योंकि हमने उसे ऐंसा समाज ऐंसा वातावरण ही नही दिया जिससे कि यह नन्ही परियां उड़ने का ख़्वाब पूरे विश्वास के साथ देख सकें,हमने कभी इतनी हिम्मत ही नही की,के कुछ ऐंसा माहौल निर्मित हो सके कि इन मासूम बेटियों को यह विश्वास हो सके कि हम हमारे देश हमारे शहर में जहाँ भी हैं सुरक्षित हैं….और कर्म के नाम पर हम सदैव ही सिर्फ़ मोमबत्ती ही जला पाए या फ़िर शोशल मीडिया पर आँसू बहाते रह गए..
तेंदूखेड़ा में 8 वर्ष की मासूम को अपनी हैवानियत का शिकार बना कर एक 19 वर्षीय नरपिशाच फ़रार हो चुका है,घटना शनिवार 5 जून की है,जब बच्ची के माता पिता कोरोना की वैक्सीन लगवाने कुछ समय के लिए बाहर गए हुए थे,तभी पास में ही रहने वाले एक युवक द्वारा उसका अपहरण कर लिया गया,और उसके बाद रविवार को घर के समीप ही एक भूसे के ढेर में उस बच्ची का शव बरामद हुआ, उस दरिंदे ने सिर्फ़ उस बच्ची की ही हत्या नही की बल्कि उसकी मासूमियत,उसके साथ साथ ऐंसी अन्य कई बेटियों के हौसलों पर भी आघात किया है,साथ ही उन माता पिता का जीवन भी ख़त्म जैसा ही कर दिया,जिन्होंने अपनी मासूम बेटी को गोद मे खिलाया और उसके लिए कई सपने सँजोकर रखे होंगे,ऐंसे मामले हमारे समाज मे आम हो चले हैं,शायद इसलिए हम भी कुछ वक्त अपना क्रोध व्यक्त कर फिर अपने आप मे ही व्यस्त हो जाते हैं,और इस प्रकार हम अनजाने में यह इंतजार कर रहे होते हैं कि कब यह आग हमारे घर को जलायेगी,और तब हम जागेंगे….
ऐंसी हर बेटी के साथ हुई विभत्स घटना हर बार हमें आत्मग्लानि और आत्ममंथन का अवसर देती है ,किन्तु हम इस प्रकार सोए हुए हैं कि जागते ही नही,हम भूल जाते हैं कि अपने आसपास अपने इर्दगिर्द कोई भी बेटी हमारी भी जिम्मेदारी है,बेटी सिर्फ़ अपने परिवार की ही जिम्मेदारी नही होती,बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी होती है,बेटी के साथ हुआ प्रत्येक आचरण सिर्फ एक व्यक्ति का आचरण नही बल्कि सम्पूर्ण समाज का आईना होता है,तो इस विभत्स कृत्य के बाद आप स्वयं ही समझ सकते हैं कि आज हमारे समाज का आईना क्या है…!
क्यों हम ऐंसी सोच को समाज मे पनपने का अवसर देते हैं,क्यों हम अपनी जिम्मेदारी नही उठाते,क्यों अपनी सरकारों को नही जगाते की आधुनिकता के नाम पर और शोशल मीडिया के नाम पर जो नग्नता और अश्लीलता नवीन पीढ़ी में घोली जा रही है,इस पर प्रतिबंध लगाया जाए,क्यों हम समय रहते ऐंसे हैवानों की पहचान नही कर पाते, हम क्यों नही समझ पाते कि जो बेटी किसी घर मे अकेली है वह आसपड़ोस के वरिष्ठ जनों की भी जिम्मेदारी है,क्यों हमारे सत्ताधीश ऐंसे कुकर्मो पर शीघ्र ही फांसी का प्रावधान बना पाते,क्यों हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं,लेकिन सड़कों पर उतरकर इन हैवानों की फाँसी के लिए कानून बनाये जाने पर सरकार को विवश नही करते…..
खैर सवाल बहुत हैं जबाब किसी के पास नही है…मासूम की जिंदगी और कई बेटियों के विस्वास और हौसलों का अंत करने वाला वह हैवान आज नही तो कल पकड़ा ही जायेगा,और फिर वर्षों तक मुकदमा चलेगा और वह अपनी जिंदगी जेल की रोटियां खाते हुए जीता रहेगा…हम और आप भी कुछ दिनों के आक्रोश के बाद अपने अपने कार्यों में व्यस्त हो जाएंगे…और किसी और बेटी के लुटने का इंतजार करेंगे…..लेकिन इस कृत्य से जो छवि हमारे समाज के आईने में दिखाई दे रही है वह नही बदलेगी…और जिन हजारों बेटियों के मन मे अविश्वास,भय उत्पन्न हुआ वह स्थायी हो जाएगा,और उनके हौसले हमेशा आसमान में उड़ने का ख़्वाब देखने से पहले इस घटना के स्मरण मात्र से टूट जाएंगे……



