वेद-पुराण-शास्त्र है ज्ञान का सागर: आचार्य अनूप देव शास्त्री

जबलपुर दर्पण। देवाराधन के लिए मानव जीवन ही एक मात्र है। श्रीमद्भागवत अमृत तो है ही वैशिष्ट्य संत के मुखारविंद से सुनने से जीवन सुखमय व्यतीत करने का एकमात्र साधन है। वेद पुराण, शास्त्र समुद्र की भांति है हर कोई अपने उपयोग के अनुसार प्रयोग करता है। सदगुरू के हर वाक्य मे शिष्य के हितकर ज्ञान छुपा है। सृष्टि मे उपलब्ध हर वस्तु सदुपयोगी है सिर्फ पहचान करना आना चाहिए। उक्त भावुकतापूर्ण उदगार श्रीमद्भागवत कथा दर्पण मे देवोत्थान एकादशी निमित्त आचार्य अनूप देव शास्त्री जी महाराज ने कहे। महाराज जी के मुखारविंद से दुर्गा मंदिर मछरहाई बीएल एस मार्ट में श्रीमद्भागवत कथा दर्पण मे नंदोत्सव का आयोजन किया गया है। श्रीमद्भागवत कथा दर्पण मे चतुर्थ दिवस जड़ भारत की कथा, अजामिल प्रसंग नृसिंघावतर,समुद्र मंथन की कथा, वामनावतार, श्रीराम जन्म श्रीकृष्ण जन्म मै वैदिक पूजन अर्चन आचार्य नवीन पाण्डे, अनिल शास्त्री, राजेन्द्र उपाध्याय ने किया। व्यास पीठ, श्रीमद्भागवत महापुराण, तुलसी महरानी का पूजन आरती श्रीमती राम बाई साहू, आराधना अमित साहू, स्वापनिल साहू, सुमित साहू, योगाचार्य राम लाल रजक, विष्णु पटेल, जगदीश गीता साहू, राधेश्याम साहू, विध्येश भापकर, रमेश साहू अंबर पुंज ने किया।



