मित्र, बालसखा और परिवार में समर्पण भाव होना आवश्यक: आचार्य अनूप देव महाराज

जबलपुर दर्पण। परिवार मे सामंजस्य एकता समर्पण समभाव ही चार धाम है। ऋषियो की ऋचाओ के अध्ययन मात्र से जीवन जीने की कला सीख सकते है। कलियुग मे भी सनातन संस्कृति का पालन करने वाले सुसंस्कृत है। संसार की प्रत्येक क्रिया और प्रतिक्रिया प्रभु का ही स्वरूप है। प्रकृति के आठ याम ही प्रभु की अष्ट पटरानिया है ।क्रोध को नियंत्रित रखने से ही अपराध से बचा जा सकता है। सिर्फ सच्चा मित्र ही हर कठिन समय मे सहयोगात्मक स्वभाव रखता है। दुख मे हर सहयोगी ही हरि का स्वरूप है। निष्काम कर्म ही पुण्य अर्जन है। उक्त भावुकतापूर्ण उदगार कथावाचक भागवताकार परम पूज्यनीय आचार्य अनूप देव जी महाराज ने पावन मुखारविंद से कार्तिक माह के पावन अवसर बी एल एस मार्ट मछरहाई मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के सप्तम दिवस सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष पर व्यास पीठ से कहे। श्रीमद्भागवत जी, व्यास पीठ का पूजन यजमान राम बाई साहू, आराधना अमित साहू, स्वापनिल साहू, सुमित साहू, रमेश साहू ने आरती कर आशीर्वाद लिया। श्रीमद्भागवत कथा मे श्री सुदामा चरित्र, श्रीमद्भागवत, गीता सार, परीक्षित संवाद को सुनकर श्रोता भाव विभोर हो गए। आज विराम अवसर पर आरती मे श्रीमद्भागवत जी का स्वामी मुकुंद दास महाराज, जगत बहादुर सिंह अन्नू,आजाद साहू, स्वापनिल साहू, अमित, सुमित, सुनील साहू, राधेश्याम साहू, गीता जगदीश साहू, रवि साहू सहित बडी संख्या मे श्रृध्दालुओ ने पूजन अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।



