गुरु चरण रज पाइके,बढ़ो तिहारो मान,गुरु कृपा से हो जाए पर पीड़ा का भान..

मध्यप्रदेश- कल 5 सितंबर था,देश के पहले उपराष्ट्रपति, दूसरे राष्ट्रपति एवं भारत रत्न डाँ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्मदिवस जिसे उनकी ही मनसा अनुरूप हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं..प्रदेश के मुखिया Shivraj Singh Chouhan के साथ साथ सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के अनेक नेताओं ने भी इस अवसर पर अनेक शिक्षकों का सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस विशेष दिवस के दूसरे दिन ही आज 6 सितंबर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नरसिंहपुर आगमन हुआ आगमन का मुख्य उद्देश्य ,राजमार्ग में चातुर्मास कर रहे संत श्री रावतपुरा सरकार के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करना था,प्रदेश में प्रसिद्ध मामा जी आज मामी जी के साथ गुरु जी का आशीर्वाद लेने पहुँचे,हालाँकि इस अवसर पर नरसिंहपुर जिलावासियों के मन मे उठ रहे सवालों एवं उनकी व्यथा से जिले के अनेक पत्रकार मुख्यमंत्री जी को अवगत कराने का प्रयास करते रहे किंतु यह संभव न हो सका शायद मामा जी जल्दी में रहे होंगे,किंतु मामा जी आप कितनी भी जल्दी में क्यों न हों हम तो लोगों की पीड़ा आपके समक्ष अवश्य रखेंगे…
पर पीड़ा सम नहिं अधमाई..
धर्म और संस्कारों धुरी पर सत्ताओं तक पहुँचे सभी धुरंधरों को शायद राम चरित मानस के उत्तरकाण्ड की यह चौपाई एवं इसका भावार्थ याद दिलाना जरूरी है
” पर हित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई॥
निर्नय सकल पुरान बेद कर। कहेउँ तात जानहिं कोबिद नर॥1॥
भावार्थ- हे भाई! दूसरों की भलाई के समान कोई धर्म नहीं है और दूसरों को दुःख पहुँचाने के समान कोई नीचता (पाप) नहीं है। हे तात! समस्त पुराणों और वेदों का यह निर्णय (निश्चित सिद्धांत) मैंने तुमसे कहा है, इस बात को पण्डित लोग जानते है।।
गुरु या शिक्षक सुनते ही हमारे दिमाग मे छड़ी लिए हुए एवं गुस्से से डांटते हुए अपने विद्यालय के किसी शिक्षक की छवि घूमने लगती है,किन्तु वही शिक्षक अपने आपको आदर्श शिक्षक की भूमिका निर्वहन हेतु कितना त्याग और परिश्रम करता है,यह शायद हम विचार भी नही कर पाते, एक शिक्षक को समाज मे अपना चरित्र आदर्श बनाये रखने की जिम्मेदारी होती है,ताकि उसके शिष्यों को प्रेरणा मिले, अपनी अल्प आय के बाबजूद भी एक शिक्षक कभी कोई अनैतिक कार्यों की ओर नही जाता,अपने परिवार का भरण पोषण समझौता कर उसी अल्प आय में करता रहता है,अपने बच्चों की तरह अपने शिष्यों को सिर्फ इसलिए डांटता है,क्योंकि उसे पता होता है,की अगर गलत आचरण के बाद एक शिष्य को तुरंत दंड न मिले तो उसमें सही आचरण करने की प्रवृत्ति जन्म नही लेगी,लेकिन वर्तमान में शिक्षकों की स्थिति अत्यंत ही मार्मिक हो चली है और अब अगर प्रदेश की जनता की पीड़ा प्रदेश के मुख्यमंत्री से न कही जाए तो किससे कहि जाए..
देश का भविष्य तो शिक्षक संभालेंगे,किन्तु शिक्षकों का भविष्य..?
कल शिक्षक दिवस था हम सबने मिलकर खूब ज्ञानवर्धक फेसबुक पोस्ट डालकर शिक्षकों का सम्मान किया,हमारे मुख्यमंत्री जी ने भी पोस्ट एवं भाषणों में शिक्षकों का सम्मान किया किन्तु शिक्षकों की वास्तविक पीड़ा के निवारण के लिए क्या किया..?
कोरोना महामारी के कारण पिछले दो वर्षों से सरकारी एवं निजी विद्यालयों का व्यवस्थित ढांचा तितर बितर हो गया है,शासकीय शिक्षक तो फिर भी तनख्वाह पर भरण पोषण कर लेते होंगे,किन्तु विद्यालय बंद होने के कारण लाखों निजी एवं अतिथि शिक्षक आज गुरबत की जिंदगी जीने को मजबूर हैं,वैसे भी निजी स्कूलों के शिक्षकों को तनख्वाह के नाम पर जितना धन मिलता है,उससे अधिक नगर तो नगर नगरपालिकाओं के सफाई कर्मचारियों की तनख्वाह है,क्षमा के साथ यह तुलना कर रहा हूँ,किन्तु शैक्षणिक एवं बौद्धिक योग्यता एवं मेहनत की वर्तमान स्थिति से जिम्मेदारों को अवगत कराने यह तुलना आवश्यक है,विद्यालय बंद होने के कारण लाखों शिक्षक बेरोजगारी का जीवन व्यतीत कर रहे हैं..
शिक्षकों की आर्थिक स्थिति इतनी भयानक हो चुकी है कि,प्रदेश समेत अनेक राज्यों में शिक्षक आत्महत्या करने पर मजबूर हैं,भोपाल समाचार में 2020 में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक तब तक प्रदेश में 46 अतिथि शिक्षक आत्महत्या कर चुके थे,13-8-2020 को भी रीवा के मनसा में एक शिक्षक द्वारा आत्महत्या की गई,11-2-2020 की खबर के मुताबिक उमरिया जिले के एक अतिथि विद्वान ने बेटे की फीस न भर पाने के कारण आत्महत्या कर ली थी,
इसके अलावा अगर जिले की बात करें तो कुछ माह पूर्व जिले के एक निजी स्कूल के कार्यरत एक संगीत शिक्षक ने लॉक डाउन के दौरान नौकरी छूट जाने के उपरांत आर्थिक तंगी एवं कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी,यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि एक लेख में सम्पूर्ण जिक्र कर पाना संभव नही है,किन्तु स्थिति की भयावहता का अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है,लॉक डाउन में लंबे समय तक बंद रहने के कारण अनेक निजी विद्यालय बंद हो चुके हैं,जिसके कारण उनके संचालक एवं शिक्षक बेरोजगार हो चुके हैं,असल मायने में अगर हम शिक्षक दिवस पर अपने शिक्षकों को कुछ देना चाहते हैं तो आवाज बुलंद कर अपनी सरकार एवं जिम्मेदारों से आग्रह करें कि इन शैक्षणिक माणिक मोतियों को टूटने से बचाने हेतु कुछ तोष नीति बनाई जाए एवं इन्हें आर्थिक सम्मान के साथ साथ पुनः इनके रोजगार की व्यवस्था हेतु कदम उठाए जाएं।
साथ ही साथ शिक्षकों के चहेते उन लाखों विद्यार्थियों को जिनके भविष्य का कोई ठौर ठिकाना अब समझ नही आ रहा,उनके विषय मे भी नीतियां स्पष्ट कर उनके भविष्य को गर्त में जाने से रोकने का प्रयास करें,ईश्वर से प्रार्थना करें प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी की गुरु पूजा सार्थक होवे एवं गुरु कृपा से उन्हें प्रदेश के लाखों गुरुओं की इस असहनीय,मौन पीड़ा का भान भी शीघ्र ही हो जाए..



