प्रकृति के साथ प्रशासन का कहर भी किसानों पर बरसा

मण्डला/नारायगंज. जिले में शासन-प्रशासन की नाकामियों को हर स्तर से देखा जा सकता है,पंचायत की भ्रष्टाचारी,शिक्षा की लाचारी, स्वास्थ्य की मारामारी,युवाओं की बेकारी,नशे की कारोबारी,सड़क की धिक्कारी से लेकर किसानों को बारीस के साथ शासन-प्रशासन की मारामारी भी सहन करना पड़ रहा है।
धान खरीदी केंद्र नारायणगंज-किसानों के लिए स्वयं का कहर बन गया है।बिन मौसम बरसात के कारण किसानों की धान अचानक बरसात होने से पूरी तरह भीग चुकी है जिसमें धान खरीदी केंद्र नारायणगंज मैं कोई व्यवस्था नहीं है।जहां मौसम विभाग द्वारा पहले ही बारिश के आसार बताऐ गए थे,परन्तु विभाग की लापारवाही के चलते अन्नदाताओं का अनाज पानी-पानी हो गया।जहां मौसम विभाग द्वारा यह स्पष्ट किया जाना कि तेज बारिश होने को है वहीं अचानक बरसात हो जाए तो वहीं खरीदी केन्द्रों पर किसानों के रखे अनाजों की सुरक्षा के लिए नाही त्रिपाल या कोई ऐसी जगह नहीं है कि वह अपनी धान सुरक्षित बचा सके जहां किसानों द्वारा एसएमएस के इंतजार में विभाग की नाकामियों के चलते लाखों का अनाज पानी-पानी हो जाए तो इसका खामियाजा कौन भुगतान करेगा और इसका जिम्मेदार कौन है।खरीदी केंद्र प्रभारी के द्वारा धान खरीदी केंद्र नारायणगंज में कोई व्यवस्था नहीं कराई जाती हैं और जो खरीदी गई धान है उसे भी नहीं बचा पा रहे हैं खरीदी केंद्र प्रभारी के द्वारा इतनी लापरवाही बरती जा रही है जिसमें शासन-प्रशासन के संरक्षण मैं धान खरीदी केंद्र में खरीदी केंद्र प्रभारी द्वारा लापरवाही की जा रही है जिसमें किसान परेशान नजर आ रहे हे धान खरीदी केंद्र नारायणगंज मैं जिसकी स्पष्ट बयां करती फोटो खरीदी केंद्र प्रभारी की लापरवाही।धान खरीदी केंद्र नारायणगंज को गैरपरवाह कर दिया गया है जिसके तहत खरीद करने से पहले अनाज का खामियाजा किसानों द्वारा वहन किया जाएगा और खरीदी के बाद खामियाजा सरकार को वहन करना होगा।
विधायक ओपन केम्प पहुंच परिवहन को लेकर किया निरीक्षण-मौसम पूर्वानुमान के बाद भी प्रशासन परिवहन ठेकेदार की लापरवाही से बेपरवाह रहे या फिर हम कहें कि स्वयं विधायक जी बारिश का इंतजार कर रहे थे इसके पहले कुछ दिन पूर्व हुए बारिश से हजारों टन अनाज गीला हुआ था जिसको लेकर कार्यवाही का आश्वासन देकर सभी जिम्मेदार गायब हो गए,इस तरह लगातार लापरवाही को राजनीतिक मुद्दा समझा जावे अथवा विभाग की नाकामियों का नमूना।बीते रात से ही बे-मौसम बारिश से हजारों लाखों टन अनाज गीला हुआ,मौसम विभाग ने हफ़्तों पहले 8-9-10 जनवरी को बारिश की चेतावनी दे दी थी विभाग भी इससे अवगत होने के बाद भी परिवहन नहीं कराया और ना ही अनाज को सुरक्षित रखने की सुविधा बनाई।निवास विधायक डॉ अशोक मर्सकोले द्वारा ओपन कैम्प ख़रीदी केंद्रों का दौरा कर ख़रीदी,परिवहन और अनाज सुरक्षित रखने तथा समय पर परिवहन के निर्देश देते रहे, परन्तु विभाग प्रशासन को कोई फ़र्क नहीं पड़ा नतीजा गरीब किसानों जा जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई कौन करेगा। खरीदी केन्द्रों में चल रहे परिवहन का कार्य ठेकेदारों की मनमर्जी पर आश्रित है वहीं प्रशासन भी नतमस्तक होकर परिवहन की समस्या को देखने के बावजूद हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और परिवहन कार्य कई वर्षों से किसी एक चहेते ठेकेदार की मनमर्जी पर चलती है।उसकी गलती से हर साल हजारों-लाखों टन अनाज ख़राब होता है।स्पष्ट यह भी है कि प्रशासकीय अधिकारी क्यों नत मस्तक होकर उसकी मनमर्जी देखते हैं और शासकीय संपत्ति को ख़राब होने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं।,
परिवहन घोटाला का मामला शासन-प्रशासन के संज्ञान में-जिले में विगत कई वर्षों से परिवहन कार्य किसी एक चिन्हित व्यक्ति को दिया जाता है इस मामले को लेकर पहले भी आला-अधिकारियों से इसकी चर्चा किया गया है तो वहीं जिम्मेदारों ने जांच का आश्वासन देकर जानबूझकर गीला और ख़राब अनाज को कम कीमत पर बेचकर कुछ व्यवसायियों को लाभ पहुँचाने और उनसे बदले में बड़ी राशि बसूल ठेकेदार और शासकीय अमले के बीच बंटवारा के चलते यह खेल खेला जा रहा है।विधायक डॉ अशोक मर्सकोले ने पिछले विधानसभा सत्र में ठरका ओपन कैम्प के साथ ही जिले के अन्य जगहों पर ओपन कैम्प और ख़रीदी केंद्रों में रखे हजारों टन अनाज ख़राब होने को लेकर विधानसभा में यह बात रखकर ध्यान आकर्षण किया था,उसके बाद भी परिवहन नहीं होना इससे प्रशासन और ठेकेदार की मिलीभगत या उनके द्वारा की जा रही लापरवाहियों से इंकार नहीं किया जा सकता।जिले में भ्रष्टाचारी इस कदर हावी हो चुकी है कि प्रशासकीय और ठेकेदारों की मनमर्जी और लापरवाही परवान पर है,कोई जिम्मेदारी नहीं,कोई डर नहीं सिर्फ मनमर्जी है और बहाने हजारों हैं,जो अपनी गिरेबान को बचाने को लेकर एक दूसरे के पाले में डाल दिया जाता है।विधायक और अन्य प्रतिनिधियों द्वारा लगातार निरीक्षण और पत्राचार किया जा रहा है, परन्तु इसका कोई असर नहीं।



