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पीएम आवास योजना पर महंगाई का असर:निर्माण सामग्री महंगी होने का दिखने लगा असर

सप्ताह भर मे लोहा पहुंचा 90 के पार व ईट,सीमेंट,लेवर भी महंगी

जबलपुर दर्पण जबेरा ब्यूरो दमोह। जनपद पंचायत जबेरा के अतंर्गत पंचायतों में पीएम आवास योजना से बनने वाले मकान में बढती कीमतों से परेशान हितग्राही आवास योजना से बनने वाले मकान में बाजार मे महंगाई की मार साफ रुप से दिखाई देने लगी है महंगाई का सबसे अधिक प्रभाव पीएम आवास योजना पर पडा है।मकान बनाने का खर्चा 25 से 30% तक बढ़ गया है जबकि हितग्राहियों की आवास बनाने के लिए जारी राशि जस की तस है।यही कारण है कि हाल ही में सरकार ने पीएम आवास के सैकड़ों हितग्राहियों के खाते पहली दूसरी किस्त के रूप मे राशि डाली लेकिन निर्माण का कार्य हितग्राहियों ने शुरू तक नहीं किया है। जनपद पंचायत जबेरा बीजाडोगरी राजाराम सिंह लोधी ने बताया है कि मेरे घर का निर्माण 50% से अधिक हो गया हो गया हैं 10 दिन पहले वह दासा पिलर के लिए 62 रूपये किलो लोहे की सरिया लेकर आए थे सरिया कम पड़ने पर वह दोवारा बजार लोहे की सरिया लेने गए तो सरिया का दाम दुकानदार द्वारा 90 रूपये किलों बताया गया एक सप्ताह मे ही अचानक 30 रू प्रति किलो सरिया मे बढ़ोतरी की मार पीएम आवास के हितग्राही को सताने लगी है। निर्माण सामग्री महंगी होने से इसके हितग्राही पर सबसे अधिक विपरीत प्रभाव पडा है। पीएम आवास हितग्राही पप्पू अहिवार बीना अहिवार ने बताया लोहा के साथ ईट,सीमेंट भी बहुत महगा हो गया है। इस समय दो हजार ईट 10 हजार रुपये सीमेंट 340 रूपये मिल रहा है शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र मे पीएम आवास के स्वीकृति हजारों मकानों का निर्माण रुक गया है। उल्लेखनीय है कि शहरी क्षेत्रों मे पीएम आवास योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा ढाई लाख रूपये राशि स्वीकृत है लेकिन वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना तहत ग्रामीण क्षेत्रो मे 1 लाख 20 हजार रूपये दिए जाते है एव मजदूरी के लिए 18 हजार अलग से दिए जातें है। लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि शहरी क्षेत्र मे ढाई लाख रूपये एव इसमें कम राशि ग्रामीण क्षेत्र मे क्यों दी जा रही है। जबकि शासन के मापदंडों के अनुसार शहर व् ग्रामीण क्षेत्रों मे आवास का मापदंड एक जैसा है। वहीं ग्रामीण को निर्माण सामग्री शहर से ही ले जाना पडती है जिसका दुलाई भाडा अलग से हितग्राही को देना पडता है और इतनी आधी कीमत मे पीएम आवास का निर्माण कराना असंभव है वही अब अचानक इस बढती मंहगाई की मार के चलते इनका सपना कैसे पूरा होगा अब गरीबों की पक्की छत कैसे बनेगी इसके बारे मे शासन प्रसासन को सोचना जरूर होगा।

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