कान्हा में भैंसानघाट के गढ़ीदादर बीट में मिला बाघ का शव

बालाघाट। बीते एक सप्ताह में दो बाघो की मौत ने वन्यप्राणी की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिये है। हालांकि वारासिवनी परियोजना के तहत बाघ की मौत की गुत्थी अब भी नहीं सुलझ सकी है, लेकिन गत दिवस कान्हा क्षेत्र में मृत मिले बाघ की मौत सामान्य बताई जा रही है। हालांकि पीएम रिपोर्ट के बाद ही बाघ की मौत की वास्तविकता का पता चल पायेगा।
मिली जानकारी अनुसार कान्हा टायगर रिजर्व के अंतर्गत भैसानघाट परिक्षेत्र के गढ़ीदादर बीट में गत 8 मई को एक बाघ का मृत शरीर पाया गया। परीक्षण में बाघ का शव 10-15 दिन पुराना प्रतीत होता है। बाघ की प्रारंभिक पहचान से नर बाघ टी-44 संभावित है। बाघ के शव परीक्षण में उसके समस्त नाखून एवं दांत मौजूद पाये गये। उपलब्ध शव पर किसी प्रकार की चोट के निशान नहीं पाये गये। बाघ के दो कैनाइन (दाँत) कुछ टूटे हुए थे। दांत के आधार पर उसकी उम्र लगभग 12-13 वर्ष से अधिक प्रतीत होती है।
बाघ का शव परीक्षण डॉ. संदीप अग्रवाल, वन्यप्राणी चिकित्सक, कान्हा टायगर रिजर्व द्वारा किया गया एवं आवश्यक सेंपल भी एकत्रित किये गये। शव परीक्षण के दौरान कान्हा टायगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक एस.के. सिंह, सहायक संचालक एस.एस. सेंद्राम एवं एस.के. सिन्हा तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण नई-दिल्ली के प्रतिनिधि के रूप में सुश्री प्रिया बारेकर, कार्बेट फाउंडेशन भी मौके पर उपस्थित थे। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, नई-दिल्ली के मानक निर्देशों के अनुरूप शव को जलाकर नष्ट किया गया।
इनका कहना है
बाघ की मौत सामान्य मौत है। फिर भी पीएम रिपोर्ट का इंतजार है। चूंकि उसके दांत और अन्य अवशेष सुरक्षित है, इसलिए उसके शिकार जैसी कोई बात नहीं है। सामान्य तौर बाघ को जब उसकी मौत का अहसास हो जाता है, तब वह ऐसी जगह छिप जाता है, जहां से वह दिखाई न दे। मृत मिला बाघ भी झाड़ियों में था। जिसके सभी अंग सुरक्षित है।
एस.के. सिंह, क्षेत्र संचालक कान्हा टायगर रिजर्व
मृत बाघ के नाखुन, दांत और सभी अवशेष सलामत है, इसलिए बाघ के शिकार जैसा कोई मामला नहीं है, संभावना है कि आपसी संघर्ष में चोटिल होने के कारण या फिर बीमारी के कारण मौत हुई होगी।
सिकंदर मिश्रा, वन्यजीव प्रेमी



