स्वार्थ की लड़ाई में उलझा शासकीय महाविद्यालय खड्डी,अतिथि विद्वानों के गैरहाजिर विवाद से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित

सीधी जबलपुर दर्पण । जिले में शासकीय महाविद्यालय खड्डी अतिथि विद्वानों के स्वार्थ में लंबे समय से फंसा हुआ है। सबसे बड़ी लड़ाई अतिथि विद्वानों की न आने पर गैरहाजिर करने को लेकर है। दरअसल अतिथि विद्वानों की नियुक्ति पूरे साल की 50 हजार रूपए प्रति माह के मान से रहती है। इस वजह से उन्हें सभी कार्य दिवस में समय तक महाविद्यालय में उपस्थित होना आवश्यक है। अब बात शासकीय महाविद्यालय खड्डी की करते हैं तो यहां एक भी नियमित प्राध्यापक के न होने से अतिथि विद्वानों के जिम्मे पठन-पाठन है। यहां नियुक्त अतिथि विद्वानों का एक ग्रुप रीवा से अप-डाउन करता है। स्वाभाविक है कि महिला अतिथि विद्वानों के लिए 200 किलोमीटर की दूरी प्रति दिन तय करना आसान नहीं है। आते भी हैं तो एक -दो घंटे में जाने की जल्दी रहती है। ऐसे में यह चाहते हैं कि रीवा से ही सार्थक ऐप में लगने वाली उपस्थिति को मान्य किया जाये। यदि उन्हें महाविद्यालय न आने पर गैरहाजिर किया जाता है तो एकजुट होकर आरोप -प्रत्यारोप शुरू कर दिया जाता है। इससे महाविद्यालय की छवि भी धूमिल हो रही है। पिछले वर्ष भी यह महाविद्यालय जंग का मैदान बना हुआ था। वहीं कई ऐसे भी अतिथि विद्वान हैं जो महाविद्यालय क्षेत्र को मुख्यालय बनाये है और समय पर आते हैं और पूरे समय तक रहते हैं, उन्हें नियमों से कोई दिक्कतें नहीं है।



