बरही में अवैध रेत खनन का आतंक, ग्रामीणों की जान जोखिम में!

ढीमरखेड़ा जबलपुर दर्पण । कटनी जिले के विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र के बरही तहसील अंतर्गत कोठिया-मुहगवां गांव में अवैध रेत खनन का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, जिससे आम ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस अवैध धंधे में स्थानीय सरपंच और उनके कुछ कार्यकर्ता खुलेआम संलिप्त हैं, और उनके द्वारा फैलाए गए आतंक से पूरा गांव दहशत में है।
जान का खतरा और दबंगई की हद
ग्रामीणों ने बताया कि ताली रोहनिया से महुनी तक की सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण अब पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। जब कोई इस अवैध खनन का विरोध करता है तो रेत माफिया उसे ट्रैक्टर चढ़ाकर जान से मारने की धमकी देते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इस दबंगई के कारण सड़क किनारे लगा एक आम का पेड़ गिर चुका है और दूसरा गिरने की कगार पर है।
सरपंच और उनके गुर्गे कथित तौर पर खुद को सत्ताधारी विधायक और उनके गनमैन संदीप तिवारी का संरक्षण प्राप्त होने का दावा करते हैं। वे ग्रामीणों से कहते हैं कि उन्हें जितना चाहें उतना रेत बेचने की खुली छूट मिली हुई है।
“जनपद अधिकारी और खनिज कर्मचारियों को भी पीटा है”
आरोप तो यहां तक है कि सरपंच ने खुलेआम धमकी दी है, “मैंने बड़वारा में जनपद अधिकारियों को पीटा है, अभी रेत खनिज कर्मचारियों को भी पीटा है। इसलिए गांव में कोई भी अधिकारी-कर्मचारी जांच करने नहीं आएगा। अगर आप लोग शिकायत करोगे तो आप लोगों को भी झूठे आरोप लगाकर जेल भिजवा देंगे।”
इन घटनाओं से पूरे गांव में अशांति का माहौल है।
सूचना के अधिकार का उल्लंघन
गांव के कुछ जागरूक नागरिकों ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत अवैध गतिविधियों से संबंधित जानकारी मांगी है, लेकिन सरपंच और सचिव द्वारा आज तक कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई है।
ग्रामीणों ने राज्य के मुख्यमंत्री से इस मामले का संज्ञान लेने और उच्च-स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस तरह की अराजकता से न केवल प्राकृतिक संपदा का ह्रास हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों की जान और सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।



