मोरवा में बेलगाम रेत माफिया – पुलिस–माइनिंग की चुप्पी पर उठे सवाल!

सिंगरौली जबलपुर दर्पण । मोरवा थाना क्षेत्र में अवैध रेत कारोबार खुलेआम चरम पर है। हालत यह है कि रेत माफियाओं के ट्रैक्टर दिनदहाड़े बिना रॉयल्टी और बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। न पहचान, न जवाबदेही—अगर कोई बड़ा हादसा हो जाए तो जिम्मेदार आखिर कौन होगा?
ताज्जुब तो तब हुआ जब एक वीडियो सामने आया, जिसमें नाबालिग बच्चे रेत से लदे ट्रैक्टर पर सवार दिखे। यह साफ तौर पर कानून की धज्जियां उड़ाना है, मगर जिम्मेदार विभागों ने मानो आंखों पर पट्टी बांध ली है।
रेत माफियाओं के ट्रैक्टर न सिर्फ ओवरस्पीड में दौड़ रहे हैं, बल्कि यातायात नियमों को ठेंगा दिखाकर हर पल सड़क हादसे का खतरा बढ़ा रहे हैं।
दूसरी ओर, मोरवा पुलिस और माइनिंग विभाग की खामोशी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या यह चुप्पी मिलीभगत का नतीजा है या लापरवाही का?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि माफिया अब सिर्फ रात में ही नहीं, बल्कि दिनदहाड़े भी खुलेआम रेत की तस्करी कर रहे हैं। इसका सीधा असर सरकार के खजाने पर पड़ रहा है और करोड़ों रुपए का राजस्व हर रोज़ पानी की तरह बह रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदेश सरकार खुद अवैध खनन और रेत माफियाओं पर सख्ती की बात करती है, तो सिंगरौली में जिम्मेदार अफसर आंख मूंदकर क्यों बैठे हैं? आखिर इन अधिकारियों को कुर्सी पर बैठाकर रखा किसलिए गया है—राज्य का राजस्व बचाने के लिए या माफियाओं को संरक्षण देने के लिए?



