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अवैध शराब परिवहन में लिप्त बना लाइसेंसी ठेकेदार

मण्डला। आदिवासी बाहुल्य मण्डला जिले में नियमों को ताक में रखकर काम करना बड़ा ही आसान है, क्योंकि गलत काम करने वाले को कमीशन के चक्कर में अधिकारी सहयोग करते हैं। ऐसी ही गलती आबकारी के सहयोग से  होते आ रही है। मामला अंजनिया समूह की शराब दुकानों से जुड़ा है, जिसमें संबंधित ठेकेदार पर अवैध शराब परिवहन करने का मामला पहले से दर्ज है और उस अपराध से जुड़े व्यक्ति को आबकारी विभाग द्वारा पुन: दुकानें रिन्यूवल के दौरान बगैर जांच के आवेदन एवं धरोहर राशि जमा करा ली गई। शराब व्यवसाय से जुड़े लोगों द्वारा जानकारी दी जा रही है कि आबकारी विभाग की नियमावली कह रही है, कि शराब दुकानों का ठेका लेने वाले व्यक्ति पर कोई भी प्रकरण  दर्ज न हो, यदि दर्ज है, तो उसे लाईसेंस न दिया जाए। जबकि अंजनिया समूह के अंतर्गत शराब दुकानों के लिए जिस आवेदक ने आवेदन दिया है। उसके विरूद्ध महाराजपुर थाने में अवैध शराब परिवहन करने का मामला दर्ज है, वहीं उक्त मामला न्यायालय में चल रहा है। इतनी बड़ी चूक आबकारी विभाग कैसे कर रहा है यह सवाल बना हुआ है?
क्या आवेदक के विरूद्ध दर्ज होगा 420 का मामला?
शराब ठेकेदारों से आबकारी नियमावली के संबंध में चर्चा हुई तो उन्होंने कहा कि जब शराब दुकानों का टेंडर लगता है ऑनलाईन जिसमें आवेदक अपनी व्यक्तिगत जानकारियां भी उस फार्म में भरकर उसे सत्यापित करता है। अब सवाल यह उठता है कि वर्ष 2013 में जिस व्यक्ति पर अवैध शराब  परिवहन का मामला दर्ज हुआ है और 2016-17 में उक्त व्यक्ति अंजनिया समूह का लाईसेंसी ठेकेदार बन जाता है। ये कैसे संभव है, जांच के बाद भी स्पष्ट होगा। लेकिन शराब कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि मामले की जांच हुई तो आवेदक विभाग को गुमराह करके लाइसेंस लिया होना पाया जाता है, तो उसके विरूद्ध 420 का मामला दर्ज होगा क्या?
दोष सिद्ध होने के बाद सजा हुई तो कौन करेगा भरपाई
शराब कारोबार से जुड़े लोगों का यह भी कहना है कि आबकारी विभाग ऐसी बहुत सी गलतियां है जिसे नजरअंदाज करता है, क्योंकि सिर्फ भरपूर राजस्व से मतलब होता है यही कारण है कि वर्षों से ऐसी गलती करते आ रहे हैं कि एक व्यक्ति जो अवैध शराब परिवहन के मामले में लिप्त पाया जाता है। ये प्रकरण वर्ष 2013 का है जब महाराजपुर पुलिस ने संदीप सिंह पिता स्व प्रयाग सिंह निवासी डिकौरी तहसील माधोगढ़ जिला जालौन उप्र  के विरूद्ध आबकारी अधिनियम के तहत 34(2) के अलावा अन्य धाराएं लगातार मामला दर्ज किया था, जिसका अपराध क्रमांक 97/13, 17 अप्रैल 2013 जिसका चालान क्रमांक 122/13 है। यह व्यक्ति दूसरे राज्य से आकर मण्डला जो मध्यप्रदेश में आता है, वहां आकर शराब का कारोबार कर रहा है। यदि न्यायालय उक्त अपराध पर सजा सुना देती है तो उक्त दुकानों की लाइसेंस फीस कौन जमा करेगा? सवाल यह उठता है कि आबकारी विभाग को होने वाली राजस्व की हानि की भरपाई की जिम्मेदारी विभाग लेगा?

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