अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत महाकौशल प्रान्त ने दोषियों पर कार्यवाही की उठाई मांग

पांढुरना जबलपुर दर्पण । अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, महाकौशल प्रांत ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा गया, हाल ही में छिंदवाड़ा जिले में हुई वह अमानवीय और दिल दहला देने वाली घटना, जिसमें लगभग 20 मासूम बच्चों की मृत्यु मिलावटी खांसी की दवा पीने से हुई, न केवल पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है, बल्कि हमारी स्वास्थ्य प्रणाली और औषधि नियंत्रण तंत्र की भयावह त्रुटियों को भी उजागर कर दिया है।
घटना का संक्षिप्त विवरण और पृष्ठभूमि:-विश्वसनीय समाचार माध्यमो तथा स्थानीय सूत्रों के अनुसार, छिंदवाड़ा जिले में कुछ शासकीय एवं निजी चिकित्सकों द्वारा बच्चों को “कोल्ड्रिफ’ नामक खांसी की सिरप लिखी गई, जिसके सेवन से कई बच्चों की तबीयत बिगड़ गई और कुछ दिनों के भीतर लगभग 20 मासूम बच्चों की असामयिक मृत्यु हो गई। जाँच में यह तथ्य सामने आया कि उक्त दवा के कई बैच मिलावटी पाए गए, जिनमें डाइएथिलीन ग्लाइकोल (Diethylene, Glycol) जैसी घातक रासायनिक अशुद्धियाँ पाई गई – जो गुर्दे, यकृत और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को नष्ट करने में सक्षम हैं। मीडिया रिपोटों के अनुसार, छिंदवाड़ा जिले से 19 सैंपल जांच के लिए भेजे गए, जिनमें से 3 सैंपल फेल पाए गए, और कुछ बैचों में 48% से अधिक डाइएथिलीन ग्लाइकोल की उपस्थिति पाई गई। इस मामले में एक चिकित्सक डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने उसी दवा को बार-बार लिखकर बच्चों को पिलाया, जबकि उस पर पहले से संदेह व्यक्त किया जा चुका था। प्रशासनिक लापरवाही इतनी गंभीर थी कि अनेक बच्चों के पोस्टमार्टम तक नहीं कराए गए, जिससे साक्ष्य-श्रृंखला कमजोर हुई और परिवारों को न्याय की प्रक्रिया में कठिनाई हुई।
प्रशासनिक एवं प्रणालीगत लापरवाही:- यह दुःखद घटना केवल एक चिकित्सक या एक कंपनी की गलती नहीं है, बल्कि यह राज्य के औषधि नियंत्रण तंत्र (Drug Control Mechanism) की गहरी विफलता को उजागर करती है। औषधि निरीक्षकों द्वारा समय पर निरीक्षण नहीं किया गया।लाइसेंस नवीनीकरण एवं गुणवत्ता नियंत्रण रिपोर्टों की समीक्षा नहीं हुई। कंट्रोल सैंपलिंग प्रक्रिया ढीली रही और मिलावटी दवा बाजार में आसानी से उपलब्ध हो गई। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को समय रहते चेतावनी नहीं दी। इन सबके परिणामस्वरूप निदर्दोष बच्चों ने अपने प्राण गँवाए जो किसी भी संवेदनशील शासन व्यवस्था के लिए अस्वीकार्य है।
ज्ञापनकर्ता की प्रमुख मागे:- अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, जिला-महाकौशल प्रांत इस गंभीर जन-विपदा को देखते हुए माननीय मुख्यमंत्री महोदय से निम्नलिखित माँगें की गई है, दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही, दोषी औषधि निर्माता कंपनी, वितरक, चिकित्सक, एवं संबंधित औषधि निरीक्षकों के विरुद्ध हत्या के समान गंभीर आपराधिक प्रकरण (IPC की धारा 302/304, NDPS, Drugs & Cosmetics Act, 1940 की धाराओं) के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाए। घटना की CBI या विशेष SIT जाँच कराई जाए, ताकि राजनीतिक या प्रशासनिक प्रभाव से मुक्त निष्पक्ष जांच हो सके।
पीड़ित परिवारों को त्वरित सहायता:-मृत बच्चों के परिजनों को कम से कम ₹25 लाख की आर्थिक सहायता, तथा स्थायी पुनर्वास एवं निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाए। जिन बच्चों को इस दवा के सेवन से गंभीर अग-क्षति या विकलांगता हुई है, उन्हें आजन्म निःशुल्क चिकित्सा एवं पोषण सहायता उपलब्ध कराई जाए।
औषधि नियंत्रण तंत्र का पुनर्गठन:-राज्य के सभी औषधि निरीक्षकों की जिम्मेदारी तय कर उन्हें Accountability Framework में लाया जाए। सभी औषधि विक्रेताओं, थोक विक्रेताओं और क्लीनिकों की Digital Monitoring System द्वारा निगरानी हो, जिससे किसी भी बैच की गुणवत्ता तुरंत सत्यापित की जा सके। प्रत्येक जिले में स्वतंत्र औषधि परीक्षण प्रयोगशाला स्थापितं की जाए। पारदर्शिता और जन-जागरूकता घटना की संपूर्ण जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, जिसमें मृत्यु संख्या, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सैंपल रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई का विवरण हो। स्वास्थ्य विभाग द्वारा “सुरक्षित दवा जनजागरण अभियान” चलाया जाए, ताकि आम जनता मिलावटी या नकली दवाओं की पहचान कर सके और शिकायत कर सके।
सामूहिक माँग:-महाकौशल प्रांत, यह हम, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, जिला-मानते हैं कि बच्चों की मृत्यु मात्र एक चिकित्सा दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक दायित्वहीनता और औषधि निरीक्षण प्रणाली की घोर असफलता है। ऐसी त्रासदी यदि दंडित नहीं की गई, तो यह समाज में विश्वास का हास और शासन की नैतिक जिम्मेदारी पर प्रश्नचिह्न बन जाएगी। इस प्रकरण की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच (Hon’ble Retired High Court Judge द्वारा) कराई जाए। दोषियों को शीघ्रतम समय में न्यायिक दंड दिया जाए। प्रदेश के प्रत्येक जिले में औषधि परीक्षण एवं निरीक्षण रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य रूप से प्रकाशित की जाए।
यह घटना केवल छिंदवाड़ा या मध्यप्रदेश की नहीं यह मानवता की सामूहिक विफलता है। हम आपसे आग्रह करते हैं कि इस घटना को एक उदाहरण के रूप में लेते हुए, राज्य में औषधि गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली का पूर्ण पुनर्गठन, सशक्त निगरानी एवं नागरिक सुरक्षा-केंद्रित नीति सुधार लागू करें। यह ज्ञापन न केवल न्याय की माँग है, बल्कि उन सभी माँ-बाप की चीखों की आवाज है जिनके बच्चों ने इस मिलावटी दवा से अपने प्राण गंवाए। ज्ञापन सोपते समय अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत महाकौशल प्रान्त-जिला पांढुरना के अध्यक्ष राजेश झाड़े, रितेश कापुर, गोपल सांबारे, रोहित गजभिए आदि उपस्थित रहे।



