अयोध्या दीपोत्सव 2025: विश्व रिकॉर्ड के दीयों के पीछे रोजगार और विकास की चुनौती

मनीष श्रीवास उत्तर भारत। दीपावाली के पावन पर्व दीप उत्सव को लेकर अयोध्या नगरी में इस वर्ष दीपोत्सव 2025 में राम की पैड़ी और सरयू नदी के तटों पर लगभग 26,17,215 दीये एक साथ जलाकर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया गया। इस तरह के विश्व रिकॉर्ड्स का क्या किया जाए? जिस प्रकार सरकारें होने पर भी ये दोनों भारत में रोजगार के लिए पलायन करनेवाले 2 सबसे बड़े राज्य हैं। ग्रामीण इलाकों/कम-विकसित जिलों में स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण रोजगार अवसरों की कमी है, जिससे लोग अन्य राज्यों या महानगरों की ओर जाते हैं। यूपी में बहुत से कामकाजी लोग अर्धकुशल या अकुशल श्रमिक हैं। परिवार के बोझ, सीमित स्थानीय अवसर, पर्याप्त रोजगार न मिलने की आशंका आदि कारणों से लाखों लोग दूसरे राज्यों या श्रम आधारित कामों के लिए पिछले 2 दशकों से खाड़ी देशों में पलायन कर रहे हैं। यदि पर्याप्त अवसर होते तो इतनी संख्या में लोग बाहर नहीं जाते। उनमें बेहतर-स्किल या काम-के अवसर तलाशने वाले पढे लिखे होनहार युवा भी हैं, जिनके हिसाब से यूपी में उन्हें उनका कोई भविष्य नजर नहीं आता। पलायन की प्रवृत्ति सामाजिक असम-वितरण, अवसर-असमानता और विकास के विषम वितरण का संकेत देती है — जो सुधार-नीति के लिए चेतावनी है।
आज के दौर में ऐसी स्थिति में, राज्य को “बेहतर तरह के रोजगार, स्किल्स-उन्नयन, उद्योग एवं निजी क्षेत्र निवेश” को बढ़ाने की ज़रूरत है ताकि लोग अपने-अपने स्थान पर बने रह सकें और पलायन कम हो। लेकिन सरकार की प्राथमिकताएँ अभी भी यूपी को आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनाने का है और इसीलिए महाकुंभ और दीपोत्सव जैसे कार्यक्रम यूपी की पहचान बनाने की कोशिश सरकार करती है। इससे क्या यूपी का कोई उज्ज्वल भविष्य हो सकता है, जवाब आप खुद सोचिए ? फिलहाल दीपोत्सव जैसे विश्वरिकॉर्ड्स पर ‘विश्वगुरु’ बनने पर खुश होकर मन को बहला लीजिए।
लेखक एड. संजय पांडे –
(अधिवक्ता, मुंबई उच्च न्यायालय)



