सीधी दर्पण

आरोग्यधाम में श्री रामचन्द्र पथ गमन ट्रस्ट द्वारा श्रीरामचन्द्र पर केन्द्रित शोध संगोष्ठी ‘पुरुषार्थ’ का हुआ आयोजन

चित्रकूट जबलपुर दर्पण। श्री रामचन्द्र पथ गमन ट्रस्ट, मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा दार्शनिक शोध संस्थान, पुरातत्व के सहयोग से श्रीरामचन्द्र पर केन्द्रित शोध संगोष्ठी ‘पुरुषार्थ’ का आयोजन कार्तिक शुक्ल एकादशी को आरोग्यधाम, दीनदयाल शोध संस्थान के सेमिनार हॉल में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो शिशिर पाण्डेय कुलपति जगतगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट, पंकज अग्रवाल अध्यक्ष कोऑपरेटिव बैंक बाँदा-चित्रकूट, डॉ रामनारायण त्रिपाठी प्रबंधक गायत्री शक्तिपीठ, नरेंद्र सिंह डीएफओ बाँदा, डॉ मनीष दुबे एवं नलिन द्विवेदी अतिथि वक्ता द्वारा प्रभु राम की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीपप्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए डॉ मनीष दुबे ने बताया कि रामचंद्र पथ गमन न्यास का उद्देश्य भगवान राम के वनवास के दौरान मध्य प्रदेश से गुज़रे पथों (राम वन गमन पथ) को चिह्नित करना और उनका आध्यात्मिक, सांस्कृतिक व पर्यटन की दृष्टि से विकास करना है, इसके अतिरिक्त यह न्यास विभिन्न विभागों संस्थाओ एवं प्रबुद्धजनों के बीच समन्वय स्थापित करके इस क्षेत्र के विकास कार्यों को गति देगा।

डॉ मनीष दुबे भोपाल ने रामायण कालीन अभियांत्रिकी और वर्तमान में उसके महत्व पर प्रस्तुतिकरण के माध्यम विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि रामायण में वर्णित इंजीनियरिंग वर्तमान के लिए एक श्रेष्ठ विकल्प है क्योंकि उसमें इंजीनियरिंग के 18 ट्रेडों के 125 से अधिक बिंदु समाहित हैं। रामराज्य में इंजीनियरिंग की दिशा और दशा ठीक होने के कारण दैहिक, दैविक और भौतिक ताप से सभी प्राणी मुक्त थे। नलिन द्विवेदी सदस्य रामपथ गमन परामर्शदात्री समिति सदस्य एवं शोधार्थी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आस्था एवं प्रमाणिकता दो अलग अलग विषय हैं, जिसके आधार पर उन स्थलों का चयन एवं उनका विकास जनभावना के अनुरूप करना है। उन्होंने अयोध्या से रामेश्वरम तक के विभिन्न स्थलों के विषय में विस्तृत जानकारी सभी के समक्ष प्रस्तुत की।

डॉ रामनारायण त्रिपाठी प्रबंधक गायत्रीशक्तिपीठ ने कहा कि चित्रकूट सभी तीर्थों में श्रेष्ठ है यह भगवान राम की तपोभूमि है, जहाँ उन्होंने वनवास का एक बड़ा हिस्सा बिताया था। यह पवित्र एवं आध्यात्मिक स्थान है जहाँ ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने स्वयं अवतार लिया था। कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा करने और मंदाकिनी नदी में स्नान करने से पाप और कष्टों का नाश होता है, तथा सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

कार्यक्रम में नगर के प्रमुख गणमान्यजनों में डॉ आर सी त्रिपाठी रजिस्टार, अशोक दुबे प्राचार्य, प्रो आंजनेय पाण्डेय अधिष्ठाता, श्रीमती संगीता जैन समाजसेवी, श्रीमती विनीता शिवहरे, प्रबलराव श्रीवास्तव, यू सी तिवारी अध्यक्ष होटल एसोसिएशन, रामआसरे सोनी सहित चित्रकूट के विशिष्ट प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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