बच्चो ने गायी गुरूवाणी, भक्तों ने टेका मत्था, गुरूद्धारे में मनाया गया श्री गुरूनानकदेव जी 556 वां प्रकाश पर्व, लंगर सेवा में दिखी समरसता

बालाघाट जबलपुर दर्पण । सिक्ख धर्म के गुरू श्री गुरूनानकदेव जी का 556 वां प्रकाश पर्व 5 नवंबर को पूरी आस्था, विश्वास और श्रद्वा के साथ गुरूद्धारा में मनाया गया। प्रकाश पर्व पर प्रातः से देर रात्रि तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जिसके तहत अखंड पाठ साहिब की संपूर्णता, साधसंगत जी का शबद कीर्तन, बच्चों का शबद कीर्तन और लंगर की सेवा की गई। जबकि शाम को आरती और फूलो की वर्षा उपरांत अरदास और आतिशबाजी की जाएगी।
गुरूद्धारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हीरासिंघ भाटिया आज 556 वां प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। संगत की हर मनोकामना पूर्ण होती हैं। उन्होंने बताया कि पंद्रहवी सदी में जब मुगल हुकुमत का बोलबाला था, हर ओर जोर-जुल्म की आंधी ने पूरे हिन्दुस्तान को घेरे रखा था। जनता त्राहि-त्राहि कर रही थी और चारो तरफ अंधेरा था, उस समय आज से 555 वर्ष पूर्व सन् 1469 में श्री गुरूनानक देवजी महाराज का अवतरण वर्तमान पाकिस्तान के तलवंडी शहर जो ननकाना साहिब के नाम से प्रसिद्ध है में हुआ था। जिन्होंने पूरे हिन्दुस्तान को जुल्मों से मुक्त कराया था।
गुरू श्री गुरूनानकदेवजी को हर पंथ और हर धर्म के धर्मावलंबियों ने अपना गुरू माना। श्री गुरूनानक देवजी ने सर्वप्रथम 20 रूपये से लंगर की सेवा शुरू की थी, जिसका उद्देश्य एक पंगत में बैठकर जात-पात, उंच-नीच, अमीरी-गरीबी को भुलाकर, एक साथ लंगर की खाने की प्रथा शुरू की। जिसके बाद गुरूनानकदेव जी के इस प्रथा को गुरू अंगददेवजी ने बड़े विशाल स्तर पर शुरू किया। जिसे आज भी पूरा सिक्ख समाज गुरू का आदेश मानते हुए उस प्रथा को जीवंत बनाये हुए है।
इनका किया सम्मान
श्री गुरूनानकदेवजी की 556 वीं जयंती पर सेवा के लिए हरप्रीतसिंह अतालिया, अशोक चंदानी, गुरूदयालसिंह सौंधी, अमरदीपकौर अतालिया, महेन्दरकौर सचदेवा, शीतल पसरिचा, पीतमकौर छाबड़ा, रोजी छाबड़ा, कुलदीप छाबड़ा, गौरीशंकर बिसेन, रमेश रंगलानी, भारती ठाकुर, कंकर मुंजारे, वैभव कश्यप को शॉल और सरोफा से सम्मानित किया गया।



