जोगदहा एवं भंवरसेन में छोंड़े गए 24 नर घडिय़ाल

सीधी जबलपुर दर्पण । जिले के नर विहीन सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य में आज देवरी चंबल से लाए गए 24 नर घडिय़ाल छोंड़े गए। वहीं एक मादा घडिय़ाल को भी लाकर छोंड़ा गया है। अब एक बार फिर घडिय़ालों से सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य गुलजार हो गया है। सोन नदी के जोगदहा घाट में 13 एवं भंवरसेन घाट में 12 घडिय़ाल छोंड़े गए हैं। साथ ही भिंड से लाए गए अलग प्रजाति के कछुए भी छोंड़े गए हैं। सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य सीधी के लिए यह बड़ी सौगात है। इकलौते नर घडिय़ाल की हाल ही में मौत के बाद सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य संकट में आ गया था। घडिय़ालों की वंशवृद्धि रुकने से सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य को लेकर विभागीय अधिकारी काफी चिंतित थे। उनके द्वारा वरिष्ट कार्यालय से पत्राचार एवं सतत संपर्क बनाकर बाहर से नर घडिय़ालों के लाने की व्यवस्थाएं काफी जल्दी सुनिश्चित कराई गई। संजय टाइगर रिजर्व सीधी के अंतर्गत सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य में घडिय़ालों की संख्या बढ़ाने को लेकर विभागीय अधिकारी वर्षों से प्रयास कर रहे हैं। आरंभ में नर विहीन सोन घडिय़ाल के होने के कारण वंशवृद्धि रुकी हुई थी। जिसके बाद अधिकारियों के सतत प्रयासों से पिछले वर्ष चंबल अभ्यारण्य से नर घडिय़ाल लाए गए थे। अभी बरसात में सोन नदी के जल स्तर में काफी वृद्धि होने के कारण यहां का इकलौता नर घडिय़ाल पानी के तेज बहाव में बहकर चोपन सोनभद्र पहुंच गया था। जिसको रेस्क्यू करके फिर से सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य के जोगदहा प्रक्षेत्र में लाया गया किंतु जांच के बाद मालूम पड़ा कि उसकी मौत हो गई है।
घडिय़ालों की होगी वंशवृद्धि-सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य में मादा घडिय़ालों की संख्या एक सैकड़ा से ऊपर है। लेकिन नर घडिय़ाल न होने के कारण वंशवृद्धि थम गई थी। काफी प्रयासों के बाद पिछले वर्ष चंबल से नर घडिय़ाल को लाया गया। लेकिन अभी बरसात के दिनों में सोन नदी के जल स्तर में काफी वृद्धि होने एवं बाणसागर बांध से भी लगातार पानी छोंड़े जाने के कारण इकलौता नर घडिय़ाल भी पानी के तेज बहाव में बहकर चोपन सोनभद्र पहुंच गया था। जिसका रेस्क्यू कर जोगदहा अभ्यारण्य प्रक्षेत्र में लाने के दौरान वह मृत हो गया। जिसके बाद से संजय टाईगर रिजर्व के वरिष्ट अधिकरियों द्वारा लगातार वरिष्ट कार्यालय से संपर्क कर फिर से दो दर्जन नर घडिय़ाल बच्चे लाकर सोन नदी के जोगदहा एवं भंवरसेन क्षेत्र में छोंड़े गए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि चंबल से मिले घडिय़ालों के बाद अब प्राकृतिक प्रजनन प्रक्रिया में सुधार की उम्मीदें हैं।
इनका कहना है।
सोन नदी के जोगदहा अभ्यारण्य में 13 एवं भवरसेन क्षेत्र में 12 नर घडिय़ाल बच्चे छोंडे गए हैं। वहीं भिंड से लाए गए 25 कछुओं को भी प्रकृतिक वातावरण में छोंडऩे की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य में मादा घडिय़ाल तो थी लेकिन नर घडिय़ाल की संख्या शून्य थी। इसके चलते विभाग काफी समय से नर घडिय़ाल उपलब्ध कराने की मांग कर रहा था।
राजेश कन्ना टी, डीएफओ
संजय टाईगर रिजर्व सीधी।



