अस्पताल में सोनोग्राफी सेंटर नहीं, मरीजों को पड़ रहा भारी खर्च

गोटेगांव जबलपुर दर्पण । स्थानीय शासकीय अस्पताल में सोनोग्राफी सेंटर की सुविधा न होने से मरीजों को इलाज के लिए भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। करोड़ों की लागत से तैयार हुआ यह अस्पताल बुनियादी सुविधाओं के अभाव में शोभा की सुपारी बन कर रह गया है। यहां न तो सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध है, न ही पर्याप्त डॉक्टर और तकनीकी स्टाफ।
हर दिन लगभग 20 मरीजों को सोनोग्राफी जांच की सलाह दी जाती है, जिनमें अधिकतर गर्भवती महिलाएं और पेट संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीज शामिल होते हैं। लेकिन अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा न होने के कारण उन्हें मजबूरीवश प्राइवेट सेंटर या फिर नरसिंहपुर और जबलपुर जैसे शहरों की ओर रुख करना पड़ता है।
मरीजों पर आर्थिक बोझ
मरीजों और परिजनों का कहना है कि अगर अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा होती तो मात्र 100 रुपये में जांच हो जाती, जबकि प्राइवेट सेंटरों में यही जांच 1000 रुपये तक में होती है। गोटेगांव में केवल श्रीधाम अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध है, वहां भी अगर भीड़ हो या स्लॉट न मिले तो मरीजों को बाहर जाना पड़ता है।
अस्पताल की ओपीडी में भीड़, लेकिन सुविधा नहीं
गोटेगांव अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन 150 मरीजों की जांच होती है, जिनमें से 20 से ज्यादा को सोनोग्राफी की जरूरत पड़ती है। लेकिन अस्पताल में मशीन और तकनीकी स्टाफ के अभाव में इन मरीजों को निजी विकल्प चुनना पड़ता है। एक्स-रे मशीन भी कई बार समय पर चालू नहीं हो पाती, जिससे मरीजों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी
अस्पताल की खस्ताहाल व्यवस्था पर न तो कोई अधिकारी ध्यान दे रहा है और न ही जनप्रतिनिधि कोई ठोस कदम उठा रहे हैं। वर्षों से सोनोग्राफी मशीन की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हुई है।



