कटनी दर्पण

बरौदा निवासी गर्भवती महिला पर स्वास्थ्य संकट, परिवार ने ब्लड ट्रान्सफ्यूजन से किया इंकार, प्रशासन चिंतित

सतीश चौरसिया उमरियापान जबलपुर दर्पण | ढीमरखेड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम बरौदा में रहने वाली गर्भवती महिला श्रीमती कविता पति अजीत कोल गंभीर स्वास्थ्य संकट से गुजर रही हैं । ब्लाक मेडिकल आफीसर बी के प्रसाद ने बताया कि जांच के दौरान उनका हीमोग्लोबिन ( एच.बी.) स्तर मात्र 3.4 ग्राम पाया गया, जो अत्यंत खतरनाक स्थिति मानी जाती है । ऐसी अवस्था में तुरंत ब्लड ट्रान्सफ्यूजन आवश्यक होता है, ताकि माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान सुरक्षित रह सके । प्राप्त जानकारी के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर सभी आवश्यक उपचार व प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के बाद चिकित्सकों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महिला को तत्काल जिला अस्पताल कटनी रेफर कर दिया था । लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा समझाइश देने के बाद भी महिला एवं उसके परिजनों ने जिला अस्पताल जाने से इनकार कर दिया । परिवार की इस हिचकिचाहट से चिकित्सा विभाग गंभीर रूप से चिंतित है, क्योंकि ऐसे मामलों में थोड़ी भी देरी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है । स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ब्लाक मेडिकल आफीसर बी के प्रसाद ने उच्च अधिकारियों को तत्काल सूचना भेजी गई है जिला कलेक्टर, कटनी – मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेने हेतु । मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कटनी – आवश्यक कार्रवाई एवं निगरानी हेतु । मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत ढीमरखेडा – महिला के स्वास्थ्य पर तत्पर कार्रवाई हेतु । तहसीलदार, ढीमरखेडा – प्रशासनिक सहयोग और हस्तक्षेप हेतु । परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, ढीमरखेडा – महिला की काउंसलिंग तथा पोषण संबंधी सहायता हेतु । जिला कार्यक्रम प्रबंधक, एनएनएम, कटनी – उच्च स्तरीय निगरानी व आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु । चिकित्सा विभाग ने संबंधित क्षेत्रों में कार्यरत आशा कार्यकर्ता, एएनएम एवं स्वास्थ्य टीम को निर्देशित किया है कि वे महिला और उसके परिवार को पुनः समझाएं तथा तत्काल ब्लड ट्रान्सफ्यूजन के लिए प्रेरित करें । अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते उपचार नहीं हुआ, तो गर्भवती महिला के जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है । प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षित मातृत्व और सुरक्षित प्रसव शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी स्वीकार्य नहीं है । स्वास्थ्य विभाग उम्मीद कर रहा है कि लगातार समझाइश और समुदाय स्तर पर सहयोग से परिवार जल्द ही अस्पताल जाने के लिए तैयार होगा, ताकि माँ और शिशु दोनों की जान बचाई जा सके । यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता की कमी को भी उजागर करता है, जहाँ गंभीर स्थितियों में भी कई परिवार अस्पताल जाने से कतराते हैं । अस्पताल प्रशासन ने अपील की है कि ऐसे मामलों में स्वास्थ्यकर्मियों के निर्देशों का पालन किया जाए और समय पर उपचार करवाकर अनावश्यक जोखिम से बचा जाए ।

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