स्ट्रीट एनिमल संरक्षण के लिए “पशुजीवा – द सोलफुल लव फाउंडेशन” का शांतिपूर्ण मार्च, मुंबई में उमड़े सैकड़ों पशु प्रेमी

मुंबई जबलपुर दर्पण । बेजुबान जानवरों की सेवा के लिए समर्पित संस्था “पशुजीवा – द सोलफुल लव फाउंडेशन” की संस्थापक व समाजसेविका सुचिस्मिता घोष के नेतृत्व में मुंबई के अंधेरी क्षेत्र में स्ट्रीट एनिमल संरक्षण को लेकर एक साइलेंट पीसफुल प्रोटेस्ट मार्च निकाला गया। वरसोवा सोशल से यारी रोड तक आयोजित इस रैली में सैकड़ों पशु प्रेमी शामिल हुए। प्रतिभागियों के हाथों में ऐसे पोस्टर्स थे, जिन पर सड़क के जानवरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा का संदेश लिखा था।
कई सामाजिक संगठनों ने इस मार्च में भाग लेकर पशुजीवा फाउंडेशन का साथ दिया। संस्था की ओर से सभी सहयोगी संगठनों को धन्यवाद और शुभकामनाएं दी गईं। सुचिस्मिता घोष ने मुंबई पुलिस का भी आभार जताया, जिन्होंने मार्च को शांतिपूर्ण रूप से संपन्न कराने में पूरा सहयोग दिया।
मीडिया से बात करते हुए सुचिस्मिता घोष ने कहा, “यह मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण था। हाल में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम में भेजा जाए। पर जिन कुत्तों–बिल्लियों को हम बचपन से खिलाते-पिलाते आए हैं, जिनकी हमने वैक्सिनेशन और देखभाल की है, उन्हें सड़क से इस तरह हटाया जाना न इंसाफ़ी है, न मानवीय। कई जगह कुत्ते, बिल्लियाँ, बंदर आदि को दूर ले जाकर छोड़ दिया जा रहा है, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और इसका खामियाजा इंसानों को भी भुगतना पड़ सकता है।”
उन्होंने सरकार से मांग की कि ABC (Animal Birth Control) कार्यक्रम चलाने के साथ-साथ सड़क के जानवरों को बेदर्दी से उठाए जाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
“हम पशु प्रेमी इन जानवरों को रेस्क्यू करते हैं, खाना खिलाते हैं, उनका इलाज, नसबंदी और वैक्सीनेशन करवाते हैं। हम सरकार के काम को आसान बना रहे हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट और सरकार से अनुरोध है कि आदेश पर पुनर्विचार कर इन बेजुबान जीवों के हित को ध्यान में रखा जाए,” उन्होंने कहा।
सुचिस्मिता घोष ने मुंबई में अत्याचार, बीमारी और लाचारी से जूझ रहे जानवरों की देखभाल के लिए विशेष केंद्र भी स्थापित किया है, जहां उनकी टीम दिन-रात सेवा में जुटी रहती है। संस्था को तीन वर्ष पूरे होने वाले हैं।
लंबे समय से सड़क के कुत्ते-बिल्लियों को खाना खिलाने वाली सुचिस्मिता घोष ने मालाड में एक फोस्टर सेंटर भी शुरू किया है, जहां दुर्घटनाग्रस्त या बीमार जानवरों का रेस्क्यू कर इलाज, नसबंदी और टीकाकरण किया जाता है। उनका कहना है कि जानवरों पर अत्याचार हमारी सभ्यता और संस्कृति—जहां जानवरों-पक्षियों की पूजा तक होती है—दोनों के खिलाफ है।
अंत में उन्होंने लोगों और प्रशासन से अपील की,
“कृपया स्ट्रीट एनिमल को परेशान न करें। उन्हें भी दर्द होता है। सुप्रीम कोर्ट इन बेजुबान जानवरों पर दया करे और उनके हित में सकारात्मक कदम उठाए।”
[मुम्बई से शामी एम इरफ़ान की रिपोर्ट]



