संपादकीय/लेख/आलेखसाहित्य दर्पण

भारत छोड़ो आंदोलन की 79वीं वर्षगांठ – टेरर फंडिंग, आतंकवाद, अलगाववाद, गरीबी, निरक्षरता, असमानता को भारत छोड़ो कहने का समय आ गया है

भारत को सोने की चिड़िया बनने में बाधक विपरीत मानवीय वैचारिकता में आखिरी कील ठोकने का समय आ गया है – एड किशन भावनानी

गोंदिया । भारत में पिछले कुछ वर्षों से हम देख रहे हैं कि दशकों पुरानी समस्याएं, शालीनता और सकारात्मक ढंग से सुलझ रही है। बाधाएं दूर हो रही है। दूरदृष्टि, सकारात्मक वैचारिकता में तेजी से विकास की ओर देश बढ़ रहा है। जिससे हर भारतीय के ह्रदय में भारत का फिर से वही सोने की चिड़िया बनने का विचार उदय हुआहै जिसे हर नागरिक को संगठित प्रयासों से पाने में ज्यादा मुश्किल नहीं होगी…। साथियों बात अगर हम दशकों पुरानी समस्याओं 370, 35A, राममंदिर, तीन तलाक, सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अध्यक्षता, भारत को गोल्ड मेडल सहित 7 पदक मिलना भारत के तेजी से बदलते सकारात्मक घटनाक्रम से पूरा विश्व हैरान है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ख्याति, सम्मान रुतबा, सकारात्मक भाव बढ़ा है। जो हम प्रत्यक्ष टीवी चैनलों के वर्चुअल प्रसारण से देख रहे हैं…। साथियों बात अगर हम भारत में आजादी का 75 वां अमृत महोत्सव मनाने की करें तो, इसकी शुरुआत इस साल मार्च से ही हो गई है और हमारे आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के लिए 75 सप्ताह की उल्टी गिनती शुरू हो गई है और 15 अगस्त 2023 को यह समाप्त होगी जो एकता और आजादी की भावना का जश्न है। जिसका आह्वान हमारे पीएम ने किया है और चर्चा की है कि कैसे यह आयोजन युवाओं के 2047 के भारत की परिकल्पना करने के लिए प्रेरित करेगी। हमारे वर्तमान अर्थव्यवस्था को जल्द से जल्द 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का पीएम का संकल्प है। साथियों, इसी अमृत महोत्सव के एक हिस्से के रूप में भारत छोड़ो आंदोलन की 79 वीं वर्षगांठ पर दिल्ली में एक प्रदर्शनी 8 अगस्त 2021 को आयोजित की गई।इस प्रदर्शनीमें सार्वजनिक अभिलेखों निजी पत्रों, मानचित्रों, तस्वीरों और अन्य प्रासंगिक सामग्री के माध्यम से भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भारत छोड़ो आंदोलन के महत्व को दर्शाने का प्रयास किया गया है। यह प्रदर्शनी 9 अगस्त से 8 नवंबर 2021 को सुबह 10 बजे से शाम 5:30 बजे तक जनता के लिए खुली रहेगी। इसका उद्घाटन माननीय संस्कृति पर्यटन और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ने 8 अगस्त 2021 शाम को किया…। साथियों बात अगर हम इस आंदोलन की करें तो,भारत छोड़ो आंदोलन द्वितीय विश्वयुद्ध के समय 8 अगस्त 1942 को आरम्भ किया गया था, जिसका मकसद भारत मां को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराना था। ये आंदोलन देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ओर से चलाया गया था। 1942 के युवाओं ने अपने नेतृत्व कौशल और जनभागीदारी के माध्यम से इस चुनौती को अवसर में बदल दिया और अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। 1942 में महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन ने औपनिवेशिक ताकतों को खदेड़ दिया। आज के नए भारत में, जैसा कि पिछले साल प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया था, हम सभी गरीबी, असमानता, अशिक्षा, खुले में शौच, आतंकवाद और भेदभाव को मिटाने और इन बुराइयों को भारत छोड़ो कहने का संकल्प ले सकते हैं।…साथियों इसके लिए हम युवाओं को आगे आना होगा और भारत को फिर सोने की चिड़िया बनाने का संकल्प लेना होगा और हमें अब टेरर फंडिंग, अव्यवस्था, विकास में बाधा उत्पन्न करने वाले मानवीय विपरीत वैचारिकता,भ्रष्टाचार आतंकवाद, अपराधिक गतिविधियां इत्यादि विपरीत मानवीय कृतियों में आखिरी कील ठोकने का संकल्प करने का समय आ गया है। जिसे हम भारत छोड़ो आंदोलन की तर्जपर कर सकते हैं। जिससे बहुत जल्द भारत सोने की चिड़िया होगा।…साथिया बात अगर हम प्रदर्शनी के उद्घाटन की करें तो पीआईबी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रीने आज नईदिल्ली में राष्ट्रीय अभिलेखागार में भारत छोड़ो आंदोलन की 79वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। आजादी के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे आजादी का अमृत महोत्सव के तहत भारत छोड़ो आंदोलन पर एक प्रदर्शनी राष्ट्रीय अभिलेखागार में लगाई गई। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम एकता, शक्ति और दृढ़ संकल्प के स्वर्णिम अध्यायों से सजा हुआ है और ऐसी ही एक गौरवपूर्ण घटना भारत छोड़ो आंदोलन थी और लगभग आठ दशक बाद भी, यह आंदोलन जनता की शक्ति का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह आंदोलन आने वाले कई दशकों तक ऐसा ही रहेगा। संस्कृति मंत्री ने आजादी का अमृत महोत्सव थीम केतहत आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से भारत की आजादी के 75वें वर्ष का जश्न मनाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा,यह न केवल हमारे राष्ट्र को स्वतंत्र करने में एक पीढ़ी के योगदान को याद करने का क्षणहै। औपनिवेशिक शक्तियों के साथ-साथ उन लोगों को भी जानना है जिन्होंने 750 वर्षों से अधिक समय तक हमारी सभ्यता की विरासत को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत माता को दी गई निस्वार्थ सेवाओं के लिए कई गुमनाम नायकों को पहचाने जाने की जरूरत है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करेंगे तो हम पाएंगे के भारत छोड़ो आंदोलन की 79वीं वर्षगांठ पर हमें संकल्प लेना होगा कि टेरर फंडिंग, आतंकवाद, गरीबी, निरक्षरता, असमानता को भारत छोड़ने पर मजबूर कर देंगे। भारत को सोने की चिड़िया बनाने में बाधक वितरित मानवीय वैचारिकता में आखिरी कील ठोकने का समय आ गया है।

-संकलनकर्ता- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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