राईस मिल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को राईस मिलर्स की समस्याओं को लेकर सौंपा ज्ञापन

बालाघाट जबलपुर दर्पण । राईस मिल एसोसिएशन जिला बालाघाट ने रविवार को एक दिवसीय प्रवास पर बालाघाट आएं प्रदेश के मुख्यमंत्री डां मोहन यादव से भेंट कर मध्यप्रदेश के राईस मिलर्स की समस्याओं के निराकरण के संबंध में संरक्षक- अनिल चतुरमोहता, गंभीर संचेती, राजकुमार कावरे, प्रकाश सचदेवा, राकेश भटेरे, जितेंद्र मोनू भगत, अध्यक्ष आनंद ठाकरे, महासचिव- समीर सचदेवा, अंकित अग्रवाल, मीडिया प्रभारी, उपाध्यक्ष- विनोद शर्मा, खेमचंद धनवानी, हिरदेश हीरवाने, अंकित संचेती, डुलेन्द्र पिंटू टेम्भरे, विजय मस्करे, अंकित अग्रवाल, सह सचिव- विजय घोष, अंशुल पाराशर, ज्ञान चौरड़िया, मुकेश पटले, आशीष असाटी, कोषाध्यक्ष विनोद राहंगडाले, सह कोषाध्यक्ष आकाश चावला सहित कार्यकारिणी सदस्यों के प्रतिनिधि मंडल ने एक हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उल्लेखित 02 दिसंबर 2025 को मध्यप्रदेश शासन के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग मंत्रालय के द्वारा पत्र कमॉक /FCS/434/0028-sec-1-29 (fcs) के माध्यम से वर्ष 2025-26 में उपार्जित होने वाली धान की मिलिंग नीति जारी की गई है। उक्त नीति के अंतर्गत् राईस मिलर्स को धान की मिलिंग करने में निम्न समस्याओं का सामना करना पड रहा है।
लोंडिग-अनलोडिंग का हो भुगतान
जिसमें उपार्जन वर्ष 2024-25 में की गई मिलिंग पर दी जाने वाली अपग्रेडेशन राशि दिए जाने संबंधी आदेश आज दिनॉक तक जारी नही किए गए है। जिससे मिलर्स की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई है। अधिकांश मिलर्स बैंक डिफाल्टर होने की स्थिति में आ गए है। अतः अपग्रेडेशन राशि दिए जाने संबंधी और उपार्जन वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में की गई मिलिंग के अंतर्गत् मिलर्स को धान चॉवल लोंडिग-अनलोडिंग का भुगतान किए जाने संबंधी आदेश आज दिनॉक तक जारी नहीं हुए है। उपार्जन वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में उपार्जन हेतु समितियों में राईस मिलर्स द्वारा जमा की गई बोरियों पर राज्यांश की उपयोगिता व्यय राशि का भुगतान किए जाने संबंधी आदेश आज दिनॉक तक जारी नहीं किए गए है। जिसकी वजह से उक्त राशि मिलर्स को अप्राप्त है। अतः उक्त राशि का भुगतान किए जाने संबंधी आदेश जारी करवाया जाएं।
दी जाएं अपग्रेडेशन राशि
शासन द्वारा उपार्जन वर्ष 2025-26 की मिलिंग हेतु जो नीति जारी की गई है उसमें किसी भी कण्डिका में पूर्व वर्षों की तरह भारतीय खाद्य निगम में चावल जमा करने पर रेशो अनुसार अपग्रेडेशन राशि दिए जाने संबंधी बात नही लिखी गई है एवं चूंकि मिलिंग उपरांत निकलने वाले रिजेक्शन एवं खण्डे से होने वाली हानि की प्रतिपूर्ति अपग्रेडेशन राशि के बिना मिलिंग कर पाना संभव नही है। अतः जारी कि गई नीति में संशोधन करके उसमें अपग्रेडेशन राशि दिए जाने संबंधी कंण्डिका जुड़वाया जाएं।
एफआरके के लिए कम्पनीयां चयनित
उक्त नीति में समय – समय में राईस मिल में भौतिक सत्यापन हेतू लिखा गया है, किन्तु वास्तविकता में मिलर्स को प्रदाय धान से निर्धारित अनुपात के अनुसार चॉवल की प्राप्ति नही होने के कारण भौतिक सत्यापन के समय स्टॉक के अंतर आता है। जिसके कारण मिलर्स मानसिक रूप से परेशानियो का सामना करना पडता है। मिलिंग एजेन्सी द्वारा चॉवल के साथ मिलाए जाने वाले एफआरके की सप्लाई के लिए कुछ कम्पनीयों को चयनित किया गया है। जिसमें मिलर्स को उन्ही कम्पनीयों से एफआरके खरीदने हेतू बाध्यता है। जिसका भुगतान मिलर्स द्वारा ही किया जाना है। इस हेतू एफआरके के भुगतान मिलर्स की प्राप्त रसीद के आधार पर सीधा विभाग द्वारा करवाया जाना सुनिश्चित किया जावें।
पोर्टल पर अनुबंधित अवधी बढे
मध्यप्रदेश के विपणन संघ के उपार्जन वालें जिलों में खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 का अपग्रेडेशन राशि का भुगतान पोर्टल पर अनुबंध में निर्धारित 2 रूपये प्रति क्विंटल की पेनाल्टी के स्थान पर 5 रूपये प्रति क्विंटल की पेनाल्टी मिलर्स पर अधिरोपित की जा रही है। समय- समय पर मिलिंग एजेंसी या शासन द्वारा कस्टम मिलिंग के कार्य पर रोक लगाये जाने (समितियों में खरीदी का भौतिक सत्यापन, मौसम की खराबी के कारण उपार्जन पर रोक, भण्डारण एवं समितियों से उपार्जन का मिलान हेतू एवं अन्य कारणों) के कारण मिलिंग कार्य प्रभावित रहा, किन्तु पोर्टल पर अनुबंधित अवधी का समय बढाया नही गया है। जिसके कारण राईस मिलर्स पर पेनाल्टी पोर्टल पर अधिक प्रदर्शित हो रही है। अतः इन कारणों से लगने वाली पेनाल्टी को माफ किया जावें। राईस मिल एसोसिएशन जिला बालाघाट के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री डां मोहन यादव से मांग करते हुए कहा, राईस मिलर्स की उक्त समस्याओं का निराकरण किया जावें। जिससे प्रदेश के मिलर्स वर्तमान में उपार्जित धान की मिलिंग का कार्य प्रारंभ कर सके। जिसके निराकरण की बात मुख्यमंत्री ने कही।



