पराली न जलाने किसानों को किया जा रहा जागरूक

बालाघाट जबलपुर दर्पण । खेतों में धान एवं अन्य फसलों के अवशेष (पराली) जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। पराली जलाने से मिट्टी के उपयोगी कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है। वहीं हवा में धुआं फैलने से प्रदूषण भी बढ़ता है। इन्हीं दुष्परिणामों को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग द्वारा किसानों को जागरूक करने के लिए जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उपसंचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने बताया कि 09 दिसंबर को कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा किरनापुर विकासखंड के ग्राम सिवनीकला, बड़गांव, सिवनीखुर्द, कटोरी, जानवा, दहीगढ़वा, देवगांव, बोरगांव, सिंगोड़ी एवं निम्देवाड़ा सहित विभिन्न धान उपार्जन केंद्रों पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के तहत ग्राम पंचायतों एवं उपार्जन केंद्रों में पराली–नरवाई न जलाने संबंधी आदेशों की प्रतियां चस्पा की गईं। किसानों को बताया गया कि पराली जलाना कानूनन दंडनीय अपराध है, जिसके लिए जुर्माना एवं जेल की सजा का प्रावधान है। विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई कि पराली जलाने के बजाय उसे खेत में ही नष्ट कर जैविक खाद के रूप में उपयोग करें, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और उत्पादन में सुधार होगा। अधिकारियों ने किसानों को रबी सीजन में धान की फसल न लगाने तथा उसके स्थान पर कम पानी में तैयार होने वाली गेहूं, चना, अलसी, सरसों आदि फसलों की खेती करने की सलाह भी दी। कृषि विभाग का यह जागरूकता अभियान किसानों को पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की सेहत सुधारने और टिकाऊ खेती अपनाने की दिशा में प्रेरित कर रहा है।



