झूलत-झूलत आ गई भवानी माई कंकाली हरे-हरे ज्वारों का धूमधाम से हुआ विसर्जन, 49 वर्षों से चली आ रही भक्ति परंपरा

मनीष श्रीवास कटनी जबलपुर दर्पण । मध्यप्रदेश के कटनी जिला स्थित नेशनल हाईवे 30 के समीप मां कंकाली धाम लखापतेरी में प्राचीन काल से झूले में विराजमान माता रानी के दर्शन और उनकी आपार आस्था ने दूर दराज तक के भक्तों को भक्तिभाव में लगातार अपनी कृपा बनाए हुए हैं। चैत्र नवरात्रि पर्व के नौवें दिवस माता रानी के हरे हरे ज्वारे का विसर्जन धूम धाम के साथ ग्राम में माता रानी झूलने में सवार होकर चली विसर्जन को। यहां मान्यता हैं कि यहां जो भी भक्त अपनी मनो कामना लेकर आते हैं उनकी इच्छा जरूर पूरी होती हैं।
लगभग 49 वर्षों से चली आ रहीं पूजा अर्चना के साथ आस्था की मिशाल आज भी यहां दिखाई दे रहीं हैं। हाथ में लिऐ तलवार, माई खंडग़ किलों के झूला में सवार हो कर पूरे गांव में भ्रमण के बाद बड़े तालाब लखापतेरी में देर रात्रि विसर्जन को जाते हैं।
नवरात्रि पर्व सहित यहां रोजाना ही श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता हैं। चारों ओर इस मंदिर की ही झलक और आस्था लोगों के दिल में जुड़ी हुई हैं। इसी प्रकार से हजारों की संख्या में माता के ज्वारे दर्शन करने भक्तों की भीड़ अधिक मात्रा में उपस्थित रहतीं हैं।
माता के दरबार में बर्मन समाज द्वारा 50 वर्षों से अधिक मां कंकाली माई धाम,मां दुर्गा धाम लाखपतेरी में पूजा अर्चना भक्ति के साथ नियमित रूप से की जाती है। जो भी श्रद्धालुगण मां लखापतेरी प्रतिदिन धाम में आते जाते हैं उन्हें माता आशीर्वाद प्रदान करतीं हैं।
माता धाम की कृपा – पंडा दयाराम बर्मन, दशरथ प्रसाद बर्मन, राकेश बर्मन, सोनू बर्मन द्वारा माता की रोजाना आरती पूजा में अपनी सेवाएं प्रदान करते चलें आ रहे हैं।
मंदिर में जुड़े गांव के अन्य सदस्यों द्वारा मंदिर में महा आरती, कन्या भोजन, भंडारे के साथ साथ ज्वारे विसर्जन में अथक योगदान बना रहता हैं।



