संयुक्त पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने दिया ज्ञापन

जबलपुर दर्पण। संयुक्त पिछड़ा वर्ग मोर्चा द्वारा राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम तीन सत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन विशेष रूप से वंचित, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के अधिकारों, सुरक्षा एवं समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिया या गया है। ज्ञापन में प्रमुख रूप से उस यूजीसी कानून का मुद्दा उठाया गया, जिसे वंचित वर्ग के छात्रों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया था, परंतु वर्तमान में वह सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से स्थगित (रोक) कर दिया गया है। मोर्चा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस महत्वपूर्ण कानून को अध्यादेश लाकर तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, ताकि विश्वविद्यालयों में हो रहे अन्याय एवं भेदभाव पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
मोर्चा ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के साथ लगातार अन्याय, भेदभाव एवं असमान व्यवहार की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिनको रोकने के लिए यह कानून अत्यंत आवश्यक है।
ज्ञापन में निम्नलिखित तीन प्रमुख मांगें विशेष रूप से शामिल की गईं। ज्ञापन सौंपते समय सहित पिछड़ा वर्ग मोर्चा के संयोजक रामरतन यादव, बैजनाथ कुशवाहा, घनश्याम यादव, धर्मेंद्र कुशवहा मनोज बाघमारे, रामराज पटेल, देवकरण पटेल देवी बोधी, अजय झरिया, परमानंद साहू, अमित पांडे,अरविंद कुशवाहा, अतुल लोधी, इंद्रकमार कुलस्ते, एडवोकेट प्रशांत चौरसिया, एडवोकेट नरेश चक्रवर्ती, प्रमोद सेन, अशोक यादव, जितेंद्र यादव, लाद बौद्ध, रज्यन यादव, विष्णु मलिक, मेहंदी हसन, मायादवी कुशवाहा, वृंदावन वर्मा, राकेश श्रीवास, मुरारी लाल चक्रवर्ती, सोमवारू कोल, अमरजीत सिंह सग्गू, राजकुमार, अमरनाथ राव संतोष मराठा, माया हुरमाडे, भीमराव साखरे, सुरेश बद्ध, गया धर्वे, नंदकिशोर टेमूरणे, आर पात्रे, मूलचंद मौरे, सुरेश जाभुलकर, डॉ सरला साहू, मंजू जैन, उमा उईके, घनश्याम चक्रवर्ती, अनंत कुशवाहा, उदयभान कुशवाहा, राजेंद्र पिल्ले राजसोनकर, गोविंद भोमरे, नरेश कुलस्ते, बालकृष्ण उईके, सुंदर बाबा, विनोद कोल सहित बडी संख्या मे उपस्थित रहे।



