रतजगा करके महिलाएं भर रही पानी, तीन दर्जन गांवों में सप्लाई करने के सरकारी दावे झूठें

डिंडोरी, जबलपुर दर्पण ब्यूरो। जिले के कोंहका नल-जल परियोजना से तीन जनपद डिंडोरी, बजाग व समनापुर के लगभग तीन दर्जन गांवों में पानी सप्लाई करने दावे झूठा साबित हो रहा है। अधिकांश गांवों में आज ग्रामीण महिलाएं हैंडपंप की कतारों में लगकर पारी-पारी से पीने की पानी भर रहे। आज भी कई गांव ऐसे हैं, जहां पानी की सप्लाई महिनों से बंद है, दूषित पानी पीकर लोग अपनी प्यास बुझा रहे। ताजा मामला बजाग जनपद क्षेत्र अंतर्गत पिड़रूखी गांव से सामने आया है, जहां गांव में पानी की सप्लाई बंद है, ग्रामीण महिलाएं गांव के अन्य जल स्रोतों से निस्तारण के लिए पानी भर रहे हैं तथा रतजगा करके पीने की पानी का जुगाड कर रहे हैं। कोंहका परियोजना अंतर्गत तीन दर्जन गांवों में पानी की सप्लाई करने के सरकारी दावे झूठा साबित हो रही है। ग्रामीण अंचलों में आज भी ग्रामीण महिलाएं पानी के लिए नलों में लाइन लग रही है और कुछ ग्रामीण इलाकों की महिलाएं तो गांव के अन्य जल स्रोतों से अपनी पानी की जरूरतों को पूरी कर रही हैं। एक-तरफ सरकार द्वारा जल-जीवन मिशन के लिए करोड़ों के बजट भेज रही है, लेकिन अंचलों में जमीनी स्तर पर सरकार के मंशा अनुरूप कार्य नहीं हो रहें, जिससे जिले के अधिकांश गांवों में आज भी ग्रामीण जल संकट से जुझ रहे हैं। बताया गया कि जिले भर में हुए जल-जीवन मिशन के तहत घटिया निर्माण कार्य, पाइप लाइन डालने में मनमानी, मेंटेनेंस व रखरखाव के अभाव में नल-जल योजना अंचलों में फैल होती दिखाई दे रही है। हालत यह है कि गांवों में कई दिनों तक पानी की सप्लाई ही नहीं होती, कई गांवों में महिनों से नल-जल योजना ढप है। ज्ञात हो कि कुछ महीने पहले ही जिले भर के सैकड़ों गांवों में अतिरिक्त दर्जनों पानी टंकी के निर्माण कार्य करवाए गए, ताकि हर-घर तक पानी पहुंचाने की सरकार कि मंशा पूरी हो सके। आरोपों के मुताबिक जिम्मेदार ठेकेदार द्वारा नियमों को ताक में रखकर पानी टंकी निर्माण, पाइप लाइन बिछाने, टोटी निर्माण सहित अन्य कार्यों में मनमानी करके निर्माण कार्यों में खानापूर्ति कर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए। अब हालात यह है कि घटिया निर्माण कार्य के चलते गांवों में कई दिनों तक पानी की सप्लाई नहीं हो रही, नल-जल योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सप्लाई कई-कई दिनों तक तकनीकी खामियां की वजह से बंद रहती है। बताया गया कि परेशानी से निजात पाने ग्रामीण आज भी भीषण गर्मी में निजी बोरों में लाइन लग कर पानी भर रहे हैं, ताकि ग्रामीण अपनी प्यास बुझा सकें। मामले को लेकर पंचायत के सरपंच, सचिव सहित जिम्मेदार कर्मी भी कोई ध्यान नहीं दे रहे, यही कारण है कि ग्रामीणों की परेशानी गर्मी के मौसम में ज्यादा बढ़ जाती है। बताया गया कि शिकायत के बाद भी जिम्मेदार पीएचई विभाग के कर्मचारी समस्या का निदान नहीं करा पा रहे।
जनसुनवाई में कलेक्टर से गुहार लगाने के बाद भी नहीं हुआ समाधान।
आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडोरी के सीमावर्ती क्षेत्र में बसे साल्हेघोरी गांव में दशकों बाद भी नल-जल योजना का पानी गांव तक नहीं पहुंचा, तो सरकार की मंशा पर सवाल उठना तो लाजिमी है। एक और सरकार जहां नल-जल योजना का ढिंढोरा पीट रही है, तो वहीं दूसरी ओर इस आदिवासी बाहुल्य जिले के सैकड़ो ऐसे गांवों है, जहां अभी तक नल-जल योजना से गांवों में पानी तक नहीं पहुंची है। पानी की समस्या को लेकर जिले के समनापुर जनपद के साल्हेंघोरी गांव के ग्रामीण जनसुनवाई में कलेक्टर से शिकायत कर प्यास बुझाने की अर्जी लगा चुके हैं। कलेक्टर मैडम को अर्जी लगाए वैसे तो महिने बीत गए, लेकिन यहां तो कलेक्टर मैडम जी का आश्वासन केवल हवा-हवाई ही निकला, ग्रामीण आज भी गांव में पानी आने का इंतजार कर ही रहे हैं। गांव में शौ फीस के लिए पानी की टंकी बनी है, गड्डे खोदकर पाइप लाईन भी बिछाई गई है, लाखों रुपए खर्च करके दो-दो बोरिंग कर मशीनें भी लगाई गई, नतीजा बूंद भर पानी ग्रामीणों को नसीब नहीं हुआ। गौरतलब है कि आजादी के दशकों बाद भी नल-जल योजना से गांवों में पानी न पहुंचने के गंभीर सवालों से ग्राम पंचायत सचिव रेवा प्रसाद गौतम से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाएं। ग्रामीणों ने बताया कि घरों में नल-जल योजना से कनेक्शन करवाने के लिए जिम्मेदार ठेकेदार के कर्मचारियों द्वारा गांव के सैकड़ो परिवारों से आधार कार्ड की कॉपी मांग कर ली जा चुकी है, बावजूद महिनों बाद भी गांव में नल-जल योजना से पानी नहीं पहुंचा, स्थानीय ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज है। स्थानीय ग्रामीणों ने मामले की जांच कराकर जिम्मेदारों ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।



