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रानी दुर्गावती ने झुकने से इंकार कर स्वतंत्रता और अस्मिता के लिए युद्ध भूमि को चुना:अशोक तेकाम

रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर व्याख्यान का हुआ आयोजन

मण्डला। रानी दुर्गावती सेवा न्यास के तत्वावधान में रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर शनिवार को व्याख्यान आयोजित किया गया। व्यख्यान का यह कार्यक्रम कोरोना संक्रमण के चलते प्रशासन के दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह ऑनलाइन आयोजित हुआ, जिसके मुख्यवक्ता सहकार भारती के राष्ट्रीय मंत्री अशोक तेकाम सिवनी जिले से शामिल हो कर अपना उद्बोधन दिया। उन्होंने रानी दुर्गावती के तेज, साहस और शोर्य का वर्णन करते हुए कहा कि विवाह के चार वर्ष बाद ही राजा दलपतशाह का निधन हो जाने पर रानी ने स्वयं ही गढ़मंडला का शासन संभाल लिया था। रानी दुर्गावती पराक्रमी होने के साथ ही बेहद खूबसूरत भी थीं इसलिए अकबर उन्हें रानी बनाने के ख्वाब देखने लगा। रानी दुर्गावती ने अकबर के आगे झुकने से इंकार कर स्वतंत्रता और अस्मिता के लिए युद्ध भूमि को चुना। कई बार शत्रुओं को पराजित करते हुए वीरांगना रानी 24 जून 1564 को मुगलों से युद्ध करते हुए गंभीर रूप से घायल हो जाने पर अपनी अस्मिता के लिए स्वयं को कटार मार ली और अपनी मातृभूमि की खातिर बलिदान दे दिया। अदम्य साहस और शोर्य की प्रतीक वीरांगना रानी दुर्गावती हम सभी के लिए पूजनीय प्रेरणास्रोत है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघ चालक एवं सह विभाग कार्यवाह द्वारा रानी दुर्गावती और भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन से व्याख्यान कार्यक्रम प्रारंभ हुआ जिसमें नगर के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में ऑनलाइन शामिल हुए।

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