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ब्रिटिश शासनकाल के तर्ज पर चल रही होमगार्ड व्यवस्था


सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट की मंशा पर डीजी ने फेरा पानी
रीवा दर्पण।
जिस तौर-तरीकों के साथ ब्रिटिश शासन काल में सिपाहियों का शोषण किया जाता था, ठीक उसी नक्शे कदम पर मध्य प्रदेश में होमगार्ड व्यवस्था को संचालित किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में मौजूद बारह हजार होमगार्ड सैनिकों के लिए विभाग की सरासर अफसरशाही सबसे बड़ी मुसीबत बन गई है। इतना ही नहीं जब परेशान होमगार्ड सैनिकों का समूह न्यायालय के दरवाजे पहुंचा तो वहां से जारी होने वाले आदेश पर ही सुनियोजित तरीके से पलीता लगाने का काम स्वयं होमगार्ड के आला अधिकारियों ने किया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए रोटेशन नीति समाप्त कर होमगार्ड सैनिकों के हित में नये नियम कायदे बनाने का आदेश जारी किया था। इस आदेश में पुलिस आरक्षक के समान न्यूनतम वेतनमान होमगार्ड को देने के लिए स्पष्ट तौर पर कहा गया है। साल 2011 में सबसे पहले हाईकोर्ट ने होमगार्ड सैनिकों के हित में आदेश जारी किया था, जिसके विरोध में मध्य प्रदेश शासन सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। यहां पर भी सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने हाईकोर्ट से जारी आदेश पर ही अपनी सहमति व्यक्त की। इसके बाद भी होमगार्ड डीजी जैसे जिम्मेदार अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जारी आदेश पर अमल करने के बजाय शासन को ही गुमराह कर दिया। होमगार्ड विभाग माननीय न्यायालय के आदेश की अवमानना डंके की चोट पर कर रहा है। न्यायालय की फटकार का कोई खास असर होमगार्ड के वरिष्ठ अमले पर नजर नहीं आ रहा है। घुमा फिराकर होमगार्ड विभाग ने होमगार्ड सैनिकों के लिए जो नया एक्ट बनाया उसमें भी रोटेशन नीति को शामिल कर दिया। होमगार्ड सैनिकों को मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना देने का काम मध्यप्रदेश में किया जा रहा है।

पहले मध्य प्रदेश में लागू था होमगार्ड के लिए बरार अधि.
15 अगस्त 1947 को भारत देश की आजादी के बाद होमगार्ड सैनिकों के लिए बरार अधिनियम लागू कर दिया गया। जिसमें स्पष्ट तौर पर रोटेशन नीति को अपनाया गया। इस व्यवस्था का विरोध हमेशा मुखर और स्पष्टवादी होमगार्ड सैनिकों ने खुलकर किया है। रोटेशन नीति के विरोध में होमगार्ड सैनिकों का समूह वर्ष 2008 में हाईकोर्ट पहुंच गया। यहां पर हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 में जारी आदेश में पुलिस आरक्षक के समान न्यूनतम वेतन होमगार्ड सैनिकों को देने के लिए कहा। होमगार्ड सैनिकों के लिए ड्यूटी संबंधी नये नियम कानून बनाने के लिए हाईकोर्ट ने आदेशित किया। हाईकोर्ट से जारी आदेश के खिलाफ मध्य प्रदेश शासन सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। जब यहां पर भी शासन को शिकस्त का मुंह देखना पड़ा तो तो होमगार्ड विभाग किसी तरह व्यवस्था में बदलाव करने के लिए तैयार हुआ। लेकिन यहां पर भी होमगार्ड विभाग ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से जारी आदेश की अवमानना करते हुए मास्टरमाइंड तरीका अपनाते हुए होमगार्ड सैनिकों को फिर फंसा दिया।

कमेटी सदस्यों ने एक्ट 2016 में ऐसे किया गुमराह
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के बारह हजार होमगार्ड सैनिकों के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बावजूद सैनिकों का शोषण करना विभाग ने अपना एकाधिकार समझा। न्यायालय की फटकार झेलने के बाद शासन ने एक कमेटी का गठन किया जो होमगार्ड सैनिकों के लिए नये एक्ट को तैयार करे। कमेटी में शामिल होमगार्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से जारी आदेश को ठेंगा दिखाते हुए होमगार्ड एक्ट 2016 को तैयार कर दिया। मध्य प्रदेश शासन को गुमराह करते हुए बरार अधिनियम (रोस्टर प्रणाली) को पुनः समायोजित करवा दिया गया। पुनः एक बार फिर होमगार्ड सैनिकों का समूह रोटेशन नीति के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गया। यहां पर वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान स्थगन आदेश जारी किया गया। स्थगन आदेश के बाद भी होमगार्ड सैनिकों को घर बिठाने का कारनामा डंके की चोट पर किया गया है।

बर्खास्त करने की धमकी देते हैं जिला कमांडेंट
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए होमगार्ड डीजी सरासर अपनी मनमानी को अंजाम दे रहे हैं। डीजे की धौंस बताकर जिला कमांडेंट होमगार्ड सिपाहियों को आदेश न मानने पर नौकरी से बर्खास्त करने की धमकी देते हैं। सतना जिले के 303 सहित मध्य प्रदेश में 12000 होमगार्ड सैनिकों को आर्थिक और मानसिक रूप से जबरिया परेशान करने की परंपरा समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। कोर्ट के आदेश की अवमानना करते हुए जिला होमगार्ड कार्यालय सतना में होमगार्ड सैनिकों की किट जबरिया जमा करवा ली गई है। कोरोना योद्धा के रूप मेंसेवाएं देने वाले होमगार्ड सैनिकों को केवल 10 माह ही नौकरी पर लिया जाना विभाग का बड़ा षड्यंत्र है। सैनिकों से किट जमा करवाने के साथ स्पष्ट तौर पर कमांडेंट धमकी देते हैं कि तुम कहीं शिकायत नहीं करोगे यदि ऐसा किया तो नौकरी से बर्खास्त कर दिए जाओगे। जिला होमगार्ड कार्यालय सतना में कमांडेंट ने सैनिकों की किट जमा करवाते हुए उन्हें घर में बैठने के लिए मजबूर कर दिया है। इसमें सुरेंद्र दाहिया, उमेश कुमार शुक्ला, अमानत खान, उमेश कुमार, मोहम्मद आजाद, राकेश सिंह, संतरा बाई, जीत दुबे, मंघराज चौधरी, जीतेंद्र गुर्जर, स्नेहराज दीक्षित और सुनीत कुमार मिश्रा शामिल हैं।

परिवार सहित रोजी-रोटी को मोहताज होंगे होमगार्ड
होमगार्ड विभाग के मुखिया सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेश की वास्तविकता से शासन को गुमराह कर रहे हैं। जानबूझकर केवल 10 महीने की नौकरी होमगार्ड सैनिकों से इसलिए करवाई जाती है जिससे उन्हें नींद ना करना पड़े। कोरोना योद्धा की भूमिका निभाने वाले होमगार्ड सैनिकों और उनके परिजनों को भूखों मारने की नीयत से डीजी होमगार्ड निरंतर काम कर रहे हैं। जिला कमांडेंट होमगार्ड सतना में नौ होमगार्ड सैनिकों को घर बिठा दिया गया है। वे और उनका परिवार दो महीने कैसे गुजर बसर करेगा? यह बताने वाला कोई नहीं है। इन होमगार्ड सैनिकों के पास बीपीएल कार्ड भी नहीं है। इन्हें राज्य अथवा केंद्र सरकार की किसी भी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है। एक दिसंबर को नौ होमगार्ड सैनिकों को रोटेशन नीति के तहत बाहर कर दिया गया है। होमगार्ड सैनिकों में विभाग की बेलगाम अफसरशाही के कारण लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। किसी भी दिन यह आक्रोश सड़क पर नजर आने लगेगा?

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