संपादकीय/लेख/आलेख

छटाई के नाम पर पेड़ पौधों कटाई की कटाई है अनुचित

आलेख : आशीष जैन (जबलपुर दर्पण)

वन संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने एवं पेड़ पौधों को लगाकर ग्लोबल वार्मिंग, पर्यावरण असंतुलन को दूर करने के उद्देश्य से सड़क किनारे, कालोनियों के गार्डन, घरों के सामने लगाए गए वृक्षों पेड़ पौधों को छटाई के नाम पर उनकी पूर्णता है कटाई अनुचित एवं अमानवीय कृत्य नजर आता है। अक्सर यह हम सभी देखते हैं और इस को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ जाते हैं। पेड़ पौधों में क्रेस्कोग्राफ के माध्यम से सन 1901 में भारतीय वैज्ञानिक सर जगदीश चंद्र बोस ने यह सिद्ध किया कि पेड़ पौधों में जीवन होता है। पेड़ पौधों में भी प्रतिक्रिया होती है। धड़कन होती है। उस पर किए गए प्रहार एवं बाहरी कारकों के कारण पेड़-पौधे के अंदर भी बदलाव होते हैं और इन्हीं बदलावों के कारण उस पेड़ पौधे की मृत्यु तक हो जाती है। इन सभी प्रयोगों को दुनिया के सामने साक्ष्य के साथ प्रस्तुत कर भारतीय वैज्ञानिक श्री बोस ने यह साबित किया कि पेड़ पौधों में भी जान बसती है जीवन होता है। अक्सर यह देखा गया है कि नगर प्रशासन एवं नागरिकों के भी द्वारा फलते-फूलते; हंसते-मुस्कुराते; लहराते पेड़ पौधों एवं वृक्षों को इस प्रकार छटाई कर दी जाती है कि छटाई, कटाई का रूप ले लेती है। यह अघोषित कटाई कभी-कभी नियमानुसार भी होती है। जिसमें छटाई के नाम पर पेड़ों का पूर्णता है कटाई कर दी जाती है। पेड़ पौधों एवं वृक्षों की शाखाएं काट दी जाती हैं और उस पौधे वृक्ष का सिर्फ तना ही शेष बचता है। हम सभी ने यह पढ़ा है कि पेड़ पौधे सूर्य के प्रकाश से पत्तियों के माध्यम से अपना भोजन बनाते हैं जिससे उस पेड़ पौधे की वृद्धि होती है और फूल फल हमें प्राप्त होते हैं। जब शाखाएं फूल फल पत्ती ही नहीं रहेंगी तो ऐसी छटाई किस काम की जिससे उस पेड़ पौधे की वृद्धि ही रुक जाए और उसकी मृत्यु हो जाए। अगर ऐसी कटाई को हम सभी छटाई कहते या करते हैं तो यह मानवीय और पर्यावरणीय दृष्टि से भी गलत है। फलदार वृक्ष शोभायमान पौधे सभी को देखने में बहुत अच्छे लगते हैं इनको लगाना संभालना देखभाल करते हुए बड़ा करना और उससे उपयोग या उपभोग करना, लगाने वाले की किस्मत में नहीं होता। इसका उपयोग-उपभोग अक्सर अन्य कोई दूसरा व्यक्ति ही करता है। उपभोग या उपयोग करते करते वह व्यक्ति मनगढ़ंत अनेक जैसे मकान की डिजाइन नहीं दिख रही कचरा पत्ती बहुत गिरते हैं, यह पेड़ पौधे रास्ते में बाधक बन रहे हैं आदि अनेक कारणों से उसकी कटाई छटाई कर देता है जिससे उस पेड़ पौधे का अस्तित्व ही नष्ट हो जाता है और पर्यावरण असंतुलन, देश-समाज और अगली पीढ़ी के लिए यह निम्न स्तरीय सोच बहुत ही घातक साबित हो सकती अतः सभी से निवेदन है कि पेड़ पौधे लगाएं सार्वजनिक स्थानों पर, सड़क के किनारे, घरों पर और उनको लगाकर उनकी देखभाल करें और उन्हें किसी भी तरीके से नष्ट ना करें और ना ही किसी को करने दें।

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