दमोह दर्पणमध्य प्रदेश

जिन पेड़ों को लगाने लगे कई वर्ष उन पर वनकर्मियों की अनदेखी से चल रही कुल्हाड़ी

दमोह जिले के तेन्दूखेड़ा वन परिक्षेत्र का मामला जहां वनकर्मियों की मिलीभगत से कई वोटों में काट रहे हरे भरे पेड़

तेन्दूखेड़ा। जंगलों में अवैध कटाई रोकने और जंगल को सुरक्षित रखने के नाम पर भले ही वन विभाग के अधिकारी शायद तेन्दूखेड़ा वन परिक्षेत्र की वास्तविक स्थिति से वाकिफ नहीं है अब इसे अधिकारी कर्मचारियों की निष्क्रियता कहा जाए या वन माफियाओं की सर्तकता जो कि तेन्दूखेड़ा वन परिक्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से अवैध कटाई का सिलसिला जोरों पर चल रहा है लेकिन संबंधित अधिकारी जानकार भी अंजान बने बैठे हैं वर्तमान स्थिति यह है कि तेन्दूखेड़ा वन परिक्षेत्र से प्रतिदिन बड़े पैमाने पर अवैध कटाई की जा रही है वनों की अवैध कटाई रोकने और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर वन विभाग द्वारा समय समय पर अभियान चलाने की बात कही जाती है लेकिन वन विभाग के दावों में कितनी हकीकत है इसका हालिया उदाहरण वन परिक्षेत्र तेन्दूखेड़ा में देखने को मिल रहा है।
खकरिया हाथीडोल बारह इन तीन वीटों में हुई जमकर कटाई
तेन्दूखेड़ा वन परिक्षेत्र में कहने को तो 24 वीट आती है लेकिन जानकारों ने बताया कि वर्तमान में खकरिया हाथीडोल और बारह वीटों के जंगलों में सबसे ज्यादा कटाई हुई है जहां पेड़ की जगह केवल ठूंठ ही बजे है क्योंकि यहां कोई वनकर्मी देखरेख को नहीं जाते हैं सभी अपने अपने घरों में बैठकर वन विभाग से मिलने वाली वेतन के खुशी खुशी जीवन जीने में लगे हैं खकरिया वीट में तो मुख्य सड़क के किनारे लगे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है जिसमें जंगली लकड़ी के साथ इमारती लकड़ी की भी कटाई हो रही है जिससे अन्य प्रजातियों के साथ सागौन के पेड़ भी है जो मौके पर आज भी पड़े हुए हैं किंतु ना उन ठूंठों में हेमर लगा है न ही उन लकड़ी को उठाया गया है जो मौके पर पड़ी है इसी तरह हाथीडोल और बारह में भी जंगलों में लगे हरे भरे पेड़ की कटाई जोरों पर चल रही है और जिम्मेदार वनकर्मी अनजान होकर अपने घरों में बैठें हुये है।
वनकर्मियों की मिलीभगत से ईट भट्टों में जा रही है जंगल की लकड़ी
वहीं दूसरी ओर भले ही सरकार जंगलों की रखवाली करने के लिए हर एक वीट में एक वनकर्मी तैनात किए जाते हैं लेकिन वहीं वनकर्मी मूकदर्शक बने हुए हैं इनकी मिलीभगत से कीमती पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलवाई जा रही है लोगों से मिल रही जानकारी के अनुसार तेन्दूखेड़ा में आने वाली वीटों में प्रतिदिन रात के समय बैलगाड़ी से लकड़ी ढो़ई जा रही है साथ ही कीमती सागौन के पेड़ों की कटाई कराये जाने की खबरें भी आ रही है वन परिक्षेत्र का जंगल तेन्दूखेड़ा सीमा से लगा हुआ है विगत महीनों में क्षेत्र भर में दर्जनों ईट भट्टों का कार्य जोरों पर चल रहा है ईट पकाने में सैकड़ों पेड़ों को धराशायी कर ईट पकाने में इस्तमाल की जा रही है लकड़ी यह सब वनपरिक्षेत्र के वीटों के वीटर्गाड प्रभारियों की मिलीभगत से जोरों पर चल रहा है तेन्दूखेड़ा की सीमाओं के आसपास के इलाकों में कई स्थानों पर ईट भट्टे सचालित हो रहे हैं इन भट्टों में जलाने के लिए लोग जंगल से लकड़ी काटकर ले जाते हैं।
राहगीर भी जता रहे कटाई को लेकर आक्रोश
बुधवार को जब हमारे संवाददाता के पास कुछ अवैध कटाई की फोटो भेजी गई जिसमें फोटो भेजने वाले ने अवैध पेड़ों की कटाई पर नाराजगी जताते हुए बताया कि वन विभाग एक और प्लांटेशन में पौधरोपण कर अवैध कटाई पर अंकुश लगाने की बात करती है ये तो समझ में आता है लेकिन जो हरे भरे पेड़ सड़कों और अंदर जंगलों में पड़े हुए हैं उनकी कटाई पर क्यों अंकुश लगा रहा है जिस पर राहगीरों ने भी आपत्ति जताई है।
बंगले से नहीं निकलते अधिकारी
तेन्दूखेड़ा वन परिक्षेत्र में अवैध कटाई के पीछे सबसे बड़ी वजह यह भी है यहां पर पदस्थ अधिकारियों की निष्क्रियता भी बताई जाती है सूत्रों के अनुसार तेन्दूखेड़ा में एसडीओ और रेंजर सहित अन्य अधिकारी फील्ड में घूमने की बजाय ज्यादातर समय अपने बंगले पर व्यतीत करते हैं जिसका पूरा फायदा जंगलों की कटाई करने वाले लोग उठा रहे हैं अगर वर्तमान में तेन्दूखेड़ा वन परिक्षेत्र में जितने सर्किल वीट की जांच की जाए तो चौकाने वाली जानकारी सामने आ सकती है सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में जितनी भी वीट हैजहां एक पेड़ कटाने के बाद ठूंठ को भी निकाल दिया जाता है ताकि इसकी भनक निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को न लगे।
इनका कहना
पेड़ों की कटाई के संबंध में तेन्दूखेड़ा वन परिक्षेत्र अधिकारी रेंजर कृष्ण वर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि जानकारी दी है वह मौके पर जाकर खुद निरीक्षण करेंगे और उन लोगों पर कार्यवाही भी होगी जो जंगलों की जगह अपने अपने घरों में रहकर नौकरी कर रहे हैं

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