खाद की किल्लत से किसान परेशान, ऊंची कीमत में खरीदने को हुए मजबूर

डिंडोरी,जबलपुर दर्पण ब्यूरो।एक तरफ शासन प्रशासन द्वारा प्रदेश के सहकारी समितियों से किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध करवाने का दावा करती है। हर किसानों को नगद एक बोरी डीएपी तथा चार बोरी यूरिया खाद उपलब्धता करवाना भी शासन प्रशासन द्वारा अनिवार्य कर दिया गया है, तो वहीं दूसरी ओर जिले के सहकारिता समिति शासन प्रशासन के दावों की पोल खोल रहे रहें हैं। बताया गया कि जिले के कुकर्रामठ, सरहरी, समनापुर, खरगहना,पिड़रूखी, समनापुर सहित जिले के अन्य सरकारी समितियों के खाद गोदाम में खाद का टोटा है। क्षेत्र में आसपास के समितियों से किसानों को खाद ना मिल पाने से किसान ऊंची कीमत में खाद खरीदने के लिए मजबूर हैं। गौरतलब है कि क्षेत्रीय किसानों को खाद समितियों में कई दिनों तक चक्कर लगाने के बाद भी किसानों को खाद नहीं मिल पा रही, जिससे बाजार से ही किसान ऊंची कीमत में खाद खरीदने के लिए मजबूर हैं, बावजूद किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करवाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही। स्थानीय किसानों ने शासन प्रशासन से जल्द से जल्द सहकारी समितियों में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करवाने की मांग की गई है।
– कहां जा रही सैकड़ों मेट्रिक टन खाद की बोरिया-शासन प्रशासन द्वारा लगातार किसानों को समय में खाद की पर्याप्त उपलब्धता करवाना सुनिश्चित करता है, समय पर किसानों को खाद मिल सके इसलिए समय से पहले ही सहकारी समिति के गोदामों में खाद पहुंचा दी जाती है,बावजूद समय पर किसानों को खाद नहीं मिल पाती।सूत्रों की माने तो अधिकतर खाद की कालाबाजारी होने के कारण किसानों को खाद के लिए परेशान होना पड़ता है। बताया गया कि लगभग 1200 सौ रुपए की मिलने वाली डीएपी खाद को बाजार से किसान 1500 से ₹1800 रूपए तक खरीद रहे हैं, तो वही यूरिया खाद लगभग ₹270 में मिलने वाली बोरी को बाजार से किसान 500 से 600 के बीच खरीद रहे हैं। खेती किसानी की समय में किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही, यही कारण है कि ऊंची कीमत में बाजार से ही खाद खरीद कर किसान खेतों में रोपा लगाने व अन्य कार्यों में उपयोग कर रहे हैं। गौरतलब है कि कुछ बड़े किसान जिम्मेदारों से मिलीभगत करके परमिट के नाम पर उपयोग से ज्यादा खाद खरीदने का परमिट बनवा लेते हैं और इसी बहाने खाद की कालाबाजारी करके इन्हीं खादों को किसानों को ही ऊंची कीमतों में बेच देते हैं। लोगों की माने तो जिले के सहकारी समितियों से खाद की कालाबाजारी करने का सिलसिला लंबे समय से जारी है, यही कारण है कि जिले में पर्याप्त खाद की मात्रा होने के बावजूद भी छोटे किसानों को खाद नहीं मिल पाता और किसान ऊंची कीमतों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर हैं।



