ऐसी भी शाला जहां तीन शिक्षक पढ़ाते हैं केवल दो बच्चों को

एसपी तिवारी मण्डला। इस आदिवासी जिले का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि यहां की शिक्षा व्यवस्था चौपट हो रही है। शासन-प्रशासन मौन धारण किये है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कोई जिले की शिक्षक बिहीन शाला या अतिशेष शिक्षकों की जानकारी मांगता है तो वे टाल मटोल कर देते हैं। जानकारी अनुसार अतिशेष शिक्षकों की सही जानकारी छिपाई जा रही है। जिले मे ऐसे भी बहुत से स्कूल हैं जहां पढने वाले बच्चे तो हैं पर उन्होंने पढाने वाले शिक्षक ही नहीं है। सूत्रों की माने तो ऐसे स्कूल जिले मे लगभग 200-300 के आस पास है ।जिस कारण यहां अध्ययन कर रहे बच्चों का भविष्य चौपट हो रहा है। और पालकों मे भी काफी रोस नजर आ रहा है। जिले मे कुछ स्कूल ऐसे भी है जहां बच्चे कम और शिक्षक अधिक, यह जिले के अधिकारियों के लिए शर्म की बात है। केवल यहां सैटिंग राज चल रहा है सैटिंग कर लो और मनमाने स्थान पर अपनी नियुक्ति करवा लो।
ये है मामला-जिला मुख्यालय से महज तीन कि.मी. दूर ग्राम पंचायत देवदरा के राजीव कालोनी अन्तर्गत प्राथमिक विद्यालय बर्रा टोला जहां केवल पढ़ने बाले बच्चे केवल दो हैं पर उनको पढाने वाले शिक्षक तीन है। जो ऐसी प्रथा कई सालों से चली आ रही है इस प्रथा के चलते शासन को हर माह लाखों का चूना लग रहा है। यहां पदस्थ तीनों शिक्षकों की हर माह 1 लाख पचास हजार से दो लाख की पगार बनती होगी और शासन द्वारा स्कूल संचालन के अन्य खर्चे और दिये जा रहे होगें। यह जिले की शिक्षा व्यवस्था के लिए बहुत बड़ी ज्वलंत समस्या है और विभाग हाथ पर हाथ रखे बैठा है जबकि यह सब खेल आला अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा है। आज जब इसकी जानकारी लेने लगभग दो बजे मीडिया बर्रा टोला स्कूल पहुंची तो वहां पर स्कूल बंद मिला, तुरंत प्राधानाध्यापक मैडम से फोन से संपर्क किया तो उन्होंने ने स्वास्थ्य खराब होने के कारण नागपुर जाना बताया अन्य शिक्षक के फोन बंद पाये गये, जिसकी शिकायत मीडिया ने तुरंत बीआरसी मण्डला को फोन पर की गई। जबकि शासन के दिशा निर्देश हैं कि शाला मे शिक्षक 10.30 से 4.30 बजे तक रहेगें। पर यहां ऐसा नही रहा है। उन्हें शासन घर मे बैठने की पगार दे रही है। शिकायत की जांच होने पर लिख कर आ जाता है कि हम मुहल्ला क्लास ले रहे थे, सर्वे कर रहे थे या ब्लॉक आफिस काम से गये थे। अब देखना है की जिले का शासन-प्रशासन क्या कदम उठाता है।
दूसरी तरफ ऐसे भी जिले मे स्कूल है जहां पढ़ने वाले बच्चे तो हैं पर उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षक ही नही है। यह जिले की कैसी बिडम्बना है जिले की जनता उन जबावदार विभीगीय अधिकारियों से पूछ रही है जिसका जबाब उन्हें जिले की जनता को देना होगा।
इनका कहना है-यहां के शिक्षक हमेशा स्कूल से जल्दी चले जाते हैं। और कभी-कभी आते भी नही। इस स्कूल मे 2 बच्चे पढ़ने वाले और तीन शिक्षक पढ़ाने वाले है।
शेरसिंह पन्द्राम
सरपंच, ग्राम पंचायत देवदरा, ज.पं.मण्डला
आपके द्वारा जानकारी दी गई मे कल जांच करूंगा जो जांच मे पाया जायेगा वह जांच प्रतिवेदन उचित कार्यवाही हेतु वरिष्ठ कार्यालय भेजूंगा।
सागर पटेल
बीआरसी, मण्डला
जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अगला अंक पढ़ें।



