शहर में इन दिनों बाहरी डॉक्टरों की बाढ़,कैसे हो हकीकत से मुखातिब

शहर में इन दिनों बाहरी डॉक्टरों की बाढ़ आई है डॉक्टरों के नाम के आगे एमडी,एमबीबीएस लेकर बुढार शहर के जगह-जगह मेडिकल दुकानों में डॉक्टरों के ठीहे जमे हुए हैं जिसमे न ही इनके पते का ठिकाना न ही सर्विस का शहर में जो प्रतिष्ठित व बड़े स्तर के डॉक्टर हैं उनको लगभग सभी जानते हैं और बकायदे उनके यहां मरीजों की कतार रहती है किंतु स्वास्थ्य को जीवन का सबसे बड़ा व्यवसाय समझकर बाहर से आए इन चिकित्सको द्वारा मरीजों को लूटा जा रहा है सांथ ही एक बार एक मरीज को देखने के बाद उसी मरीज को देखने के लिए फीस की मांग की जाती है जबकि औपचारिकता ये बनता है किसी चिकित्सक द्वारा एक बार एक मरीज को देख लिया जाए और उसे एक सप्ताह में पुनः बुलाया जाए तो उससे अपने इलाज का फीडबैक लिया जाए न कि बार-बार पैसे ऐंठने का जुगाड़ जमाया जाए
अगर योग्य हैं तो क्यों पड़ रहा बाहरी ठीहे की जरूरत-ज्ञात हो डॉक्टर एक ऐसा पेशा है जो एक झोलाछाप भी अपना एक निजी क्लीनिक खोलकर आमजनता में विश्वास बनाए रखता है किंतु एमडी,एमबीबीएस डॉक्टरों को बुढार शहर में आकर सप्ताह के कुछ दिनों को चुनकर उनसे व्यापार का एक पेशा बनाया जा रहा है सांथ ही सप्ताह के एक दिन की उपलब्धता और उसके बाद उस दरमियान नही रहने से सप्ताह के किसी भी दिन मरीजों को जरूरत पड़ सकती है जिससे महज वीडियो कॉल और टेलिफोनिक सम्पर्क को इलाज का जरिया नही बनाया जा सकता है अहम पहलू यह भी है कि एक योग्य चिकित्सक किसी झोपड़ी में भी बैठ जाए तो वहाँ मरीजों का तांता लग जाता है जबकि बाहर से आए हुए इन चिकित्सको का किसी भी प्रकार से कोई पहचान पूर्ण रूपेण नही हो पाता सांथ ही मेडिकल स्टोर एवं पैथोलॉजी संचालको की कमाई में चार गुना इजाफा होता है
दलालों के माध्यम से हो रहा प्रचार प्रसार-इन डॉक्टरों के आवभगत में दलालों की भूमिका सक्रिय हैं बकायदे उन दलालों को मासिक तनख्वाह दी जाती है सांथ ही सम्बंधित मेडिकल स्टोर संचालको के यहां ही इनके लिखे दवाई उपलब्ध होते हैं डॉक्टरों की योग्यता पर सवाल तो नही पर ये डॉक्टर्स कहाँ से आते हैं कहाँ कार्यरत हैं और अपने नौकरी के दरमियान सप्ताह का दिन कैसे तय होता है यह एक जांच का विषय है सांथ ही जो मरीज इनके यहां इलाज ले रहे हैं उनका भी फीडबैक जरूरी है कि इनका इलाज कितना कारगर है। कोयलांचल नगर के स्थानीय लोगों से अपनी ब्रांडिंग कराना और गरीब मरीजों से पैसा बटोर कर ले जाना इन डॉक्टरों के फितरत में है।



