दस हजार की चाकरी करोड़ो का संसाधन, रोजगार सहायक प्रश्रचिन्ह के घेरे में

जबलपुर दर्पण। शहडोल/बुढार
जनपद में कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों व अन्य अफसरों की बात और उनके शानों की शौकत की बात तक तो ठीक है, पर एक 10 हजार के नीचे की चाकरी करने वाला रोजगार सहायक करोड़ो का आसामी हो यह तो समझ से परे है ग्रामीणों के आवास,शौचालय, रोड, पुलिया व अन्य निर्माण कार्यो में गफलत फरमाने वाले इस रोजगार सहायक के दर्जनों ऐसे किस्से हैं जो सुनकर हैरान होने पे विवश कर देते हैं बुलेरो,एक लाख से ऊपर की गाड़ी,आई 20 कार अल्टो मारुति सुजुकी व अन्य दो पहिया वाहनों का मॉलिक यह रोजगार सहायक तो एक मुख्य कार्यपालन अधिकारी के हैसियत को छूने में आमादा है
आज भी निर्माण कार्य अधूरा
पंचायत के ऐसे दर्जनो निर्माण कार्य हैं जिस पर रोजगार सहायक ने आँख मूंदकर बेईमानी बरती है इतना ही नही कुछ ऐसे सीसीरोड हैं जो मात्र चन्द माह में ही उखड़कर अपनी गनीमत बयाँ कर रहे हैं सांथ ही रोजगार सहायक ने पंचायत भवन निर्माण कार्य आज तक पूर्ण नही कराया और पैसा गबन कर लिया गया
आवास योजना में दर्जनो ऐसे हितग्राही हैं जो रोजगार सहायक के रिश्वतखोरी से तंग हैं कईयों के तो रिश्वत दिए बिना आज भी अधूरे छत खड़े हैं या फिर छप्पर की घर मे टपकते पानी की देखते रहते हैं
ठेकेदारी से निर्माण हुआ बाउंड्रीवाल
समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बाउंड्री वाल ठेकेदारी प्रथा से कराया गया ठेकेदार अमित द्वारा निर्माण कराया गया सांथ ही इस बाउंड्रीवाल में भी अमित और अजय की जोड़ी ने दूध और छांछ का खेल-खेला रोजगार सहायक के लम्बी शिकायतो में एक अन्य शिकायत भी शामिल है जिसमे देवरी बस्ती की रोड़ का पैसा निकाल लिया गया लेकिन रोड आज तक नही बनाया गया।
सीमित आय पर करोड़ों के संसाधन का मॉलिक
रोजगार सहायक देवरी के पिता ओरियंट पेपर मील में कार्यरत है जिनकी मासिक वेतन सीमित है बढती महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों को देखते हुए यह आभास हो जाएगा कि ओपीएम में नौकरी करने वाले महज अपना दैनिक जरूरतें पूरा कर सकते हैं बावजूद इसके रोजगार सहायक के इतने लंबे संसाधनों की कतार ने तो इनके नौकरी से लेकर अकूत संसाधनों पर प्रश्रचिन्ह खड़ा कर दिया
घर के पास ही चल रहा कियोस्क जो बना लूट का अड्डा
रोजगार सहायक अपने घर के पास ही मुकेश नामक व्यक्ति से कियोस्क संचालित करवा रहा है सांथ ही उस कियोस्क में सैकड़ो हितग्राहियों के लेनदेन होते हैं जिसमे कुछ के अंगूठे लगकर तो किसी का अंगूठे लगवाकर सेंध मार यही नही इसी कियोस्क में आवास के नाम का कमीशन भी आहरित किया जाता है जो गरीब हितग्राहियों के न देने पर उनका आवास रोक दिया जाता है
बहरहाल रोजगार सहायक के अभी और ऐसे किस्से हैं जो आगामी समाचार में प्रकाशित होगा किन्तु मुख्य पहलू यह है कि ऐसे रोजगार सहायक पर भी जांच होना चाहिए जो करोड़ो के आसामी हैं



