नैनपुर में रिश्वत लेते फिर पकडाया, आरआई और पटवारी

जबलपुर दर्पण मंडला। आदिवासी बाहुल्य जिला मंडलामें भ्रष्टाचार जमकर पनप रहा हैं। यूं कहें तो मंडला जिला भ्रष्टाचार का चारागाह बन गया हैं। बड़े अधिकारी ही भ्रष्टाचार कराने के मुख्य सूत्रधार होते हैं। भ्रष्ट कारनामों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि बीत रहें सितम्बर माह की 9 तारीख को ही रिश्वत लेते पटवारी केशव प्रसाद ठाकुर को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। जिससे सबक लेने के बजाय राजस्व विभाग का आरआई बेखौफ रिश्वत मांग रहा था, जिसे जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने 15 हजार रूपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। मिली जानकारी अनुसार फरियादी जहरमऊ निवासी कृषक सुभाष जंघेला की जमीन डायवर्सन के एवज में आरआई योगेश वरकड़े ने 28 हजार रूपए की मांग किया था, तब से परेशान होकर किसान ने जबलपुर लोकायुक्त से संपर्क किया। जबलपुर लोकायुक्त के निर्देशन में किसान ने आरआई योगेश बरकड़े के पास जाकर 15 हजार रूपए नगद और 13 हजार रूपए का चैक लेकर पहुंचा, जैसे ही आरआई ने रूपया लिया वैसे ही लोकायुक्त टीम ने पहले से घात लगाए बैठे रिश्वतखोर आर आई दबोच लिया। बताया जाता हैं कि इस मामले में लोकायुक्त ने आरआई के दो सहयोगियों को भी सह आरोपी बनाया गया हैं।
रिश्वत का आरोपी पटवारी को एसडीएम ने किया निलम्बित
उल्लेखनीय हैं कि आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला के अंतर्गत आने वाली नैनपुर तहसील के अंतर्गत ग्राम पाठा सिहोरा, पटवारी हल्का नम्बर 9 में पदस्थ पटवारी को बीते दिनांक 9 सितम्बर 2021 को कृषक फरियादी से भूमि नामांतरण व ऋण पुस्तिका बनाने के लिए 5 हजार रुपए की रिश्वत लिया था। जिसे अब नैनपुर एसडीएम के द्वारा निलम्बन की गाज गिरा दी गई हैं।
बता दे कि राजस्व विभाग का नाम रोशन करने वाले पटवारी केशव प्रसाद ठाकुर के द्वारा अपने कर्तव्य के विपरीत आचरण किये जाने से म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 (1) (2) (3) के विपरीत होने और नियम 10 के अंतर्गत केशव प्रसाद ठाकुर द्वारा अपने कर्तव्य के विपरीत कार्य किये जाने के कारण म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया हैं। निलम्बन अवधि में रिश्वत के आरोपी पटवारी का मुख्यालय एसडीएम कार्यालय नैनपुर कर दिया गया हैं। रिश्वत के आरोपी पटवारी को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।
रिश्वतखोरों को पद से बर्खास्त करने की मांग
देश की न्यायायिक लचर व्यवस्था के चलते सुनियोजित तरीके से लोकायुक्त पुलिस के द्वारा फरियादी से काम के एवज में रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद भी बर्खास्त ना कर मात्र निलम्बन की कार्यवाही की जाती हैं। आमजनों के कार्य करने के लिए शासन द्वारा हर विभाग में अधिकारी कर्मचारी नियुक्त करते हैं, जिससे आम लोगों के कार्य समय-सीमा में हो सके, जिसके एवज में सरकार उन्हें तनख्वाह के अलावा अन्य प्रकार के स्वत्व व भत्ता देती हैं। इसके बाद भी ऐसे कर्मचारियों व अधिकारियों को रूपयों की भूख खत्म नहीं होती। गरीब नौकरी में ना रहते हुए मजदूरी एवं अपना व्यवसाय कर स्वयं व अपने परिवारजनों का ऊदर पोषण करता हैं, इसके बाद भी आमजनों को सरकारी काम व शासन की निःशुल्क योजना का लाभ लेने के लिए राज्य के नेताओं के आलावा अधिकारी कर्मचारियों को भी रिश्वत देना पड़ता हैं।
हर विभाग में चलता हैं रिश्वत का बोलबाला
शिक्षित व जागरूक व्यक्तियों के द्वारा लाचार होकर रिश्वत लेने वालों को पकड़ वाने के लिए मजबूर होना पड़ता हैं। इसके बाद भी रिश्वत के आरोपी को बर्खास्त ना कर मात्र निलम्बन की कार्यवाही की जाती हैं। इसे न्यायायिक लचर व्यवस्था ही कहीं जाती हैं। रिश्वत के आरोपी को तत्काल बर्खास्त कर जेल के सलाखों में भेजना चाहिए, जिससे भविष्य में नौकरी में रहते हुए आमजनों को परेशान कर रिश्वत ना ले सके, ऐसा कानून बनना चाहिए। अशिक्षित व गरीब तबके के लोग भ्रष्टाचारियों की चंगुल में फंसकर आसानी से अपनी खून पसीने की कमाई को रिश्वत देकर अपना काम कराते हैं। रिश्वत लेने की कड़ी नीचे स्तर से लेकर ऊपर स्तर तक बड़ी आसानी से ली जाती हैं। शिकवा शिकायत करने पर या तो कुछ त्रुटियां निकाल कर काम को अधर में लटका दिया जाता हैं, यह हैं भारत की न्यायायिक व्यवस्था।



