भुट्टे तो बहुत महंगे……..है।

✍🏻✍🏻✍🏻 आशीष जैन, उप- संपादक, दैनिक जबलपुर दर्पण समाचार पत्र
संपादकीय


भारत गणराज्य के एक मंत्री के मुख से जब यह शब्द निकले तो संपूर्ण देश को एक बात पता चली कि, भुट्टे तो बहुत महंगे है। इतना महंगा भट्टा, कैसे हो सकता है? नहीं हो सकता, नहीं हो सकता, यहां तो रामराज्य की कल्पना करने वाली पार्टी के एक मंत्री, वरिष्ठ नेता दशकों से किसी विशेष संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति एक आम छोटा व्यापारी जो सड़क के किनारे फुटपाथ पर भुट्टे सेंक कर नींबू एवं नमक लगाकर कागज में लपेट कर देने वाला वह गरीब बच्चा, जो बहुत मशक्कत के बाद चार पैसे कमा पाता है और अपने जीवन यापन करता है। उस शख्स से इस प्रकार की वार्तालाप संपूर्ण क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ज्ञात हो कुछ दिनों पहले केंद्रीय लौह अयस्क इस्पात राज्य मंत्री मंडला-सिवनी संसदीय क्षेत्र के सात बार से सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का काफिला किसी सड़क से गुजर रहा था तब उनकी नजर जब सड़क के किनारे फुटपाथ पर भुट्टा सेक कर बेचने वाले एक छोटे से बच्चे पर पड़ी तब उन्हें खाने की इच्छा हुई। उन्होंने तीन भट्टे पर आए नींबू लगवाया, नमक लगवाया और कागज में लपेट कर पैक करने की बात कही। जब पैसे देने की बात आई उस बच्चे ने ₹45 की मांग की। तब केंद्रीय मंत्री के मुख से यकायक बात निकली इतना महंगा भुट्टा, यहां तो भट्टा फ्री मिलता है। क्यों भाई इतना महंगा भुट्टा क्यों दे रहे। जब एक आम नागरिक मंडी से कुछ दर्जन पट्टे खरीद कर लाता है, सेकने के लिए लकड़ी लाता है, कोयले लाता है और हर एक भुट्टा अच्छी तरह सेक कर उसे तत्काल खाने योग्य बना कर जब वह पांच- आठ रूपये मुनाफा कमाता है तब इसमें किसी भी व्यक्ति को कोई हर्ज नहीं होना चाहिए। लगभग पांच रूपये प्रति नग कमाना कोई गलत बात नहीं है। इतनी तो उसकी मेहनताना बनता ही है। पर जब केंद्रीय मंत्री कहते हैं, यह तो बहुत महंगा है तब सभी को समझ में आता है कि वाकई में देश में महंगाई बढ़ गई है। ऐसी कौन सी वस्तु है जो विगत दो- चार सालों में सस्ती हुई हो। हर चीज, हर वस्तु का रेट पिछले कुछ सालों की तुलना में बड़ा ही है घटा नहीं। अब तो यह गंभीरता से सोचने और विचार करने की बात है। है। भुट्टा, मक्का, मकई या अंग्रेजी भाषा में कार्न कहे जाने बाले अनाज में अब यह भी जीएसटी के दायरे में अ गया है। भारत में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के लिए जीएसटी दर चार स्लैब में विभाजित है, ये 5% जीएसटी, 12% जीएसटी, 18% जीएसटी और 28% जीएसटी हैं। हालांकि मक्का में 5% टेक्स का प्रावधान है तथा इससे बनाने बाले कुछ उत्पाद में जैसे पापकार्न आदि में 18% जीएसटी लग रहा है।
साधारण सा दिखने, बिकने और हर जगह उपलब्ध होने वाला भुट्टा असल में सस्ता बिल्कुल नहीं होता। अगर कोई व्यक्ति से ऑनलाइन खरीदना चाहे तू इसकी कीमत देखकर आप आश्चर्यचकित हो सकते। ऑनलाइन सामान उपलब्ध कराने वाले कुछ चुनिंदा कंपनियों में फ्रेस स्वीट पॉर्न, बेबी कॉर्न आदि विभिन्न नामों से यह अलग-अलग कीमत पर उपलब्ध है। जिओ मार्ट में इसकी कीमत 14₹ प्रति नग, डी -मार्ट में 38₹ प्रति दो नग एवं ऑनडोर एप पर 50₹ की कीमत पर उपलब्ध हो रहा है।
हो सकता है इस संपूर्ण घटनाक्रम में माननीय मंत्री जी ने यह बातें एक मजाक के रूप में कहीं हो। खैर जो भी हो…….. मंत्री जी की बातें; मंत्री जी ही जाने। बेहतर होता मंत्री जी उस बच्चे से यह कहते कि बेटा आप स्कूल क्यों नहीं गए। क्या आप स्कूल नहीं जाते। आपके मां-बाप कहां है। क्या मजबूरी है बेटा कि तुम अपना स्वर्णम बचपन यह काम करके बर्बाद कर रहे हो।



