शहर में अवैध होर्डिंग्स का जालः खतरे की घंटी, प्रशासन मौन

शहडोल जबलपुर दर्पण । शहर इन दिनों अवैध होर्डिंग्स के मकड़जाल में फंसा हुआ है। मुख्य सड़कों से लेकर आवासीय क्षेत्रों तक, हर जगह अवैध होर्डिंग्स की भरमार है, जो न केवल शहर की सुंदरता को बदरंग कर रहे हैं, बल्कि संभावित हादसों को भी न्योता दे रहे हैं। इनमें से कई होर्डिंग्स तो घरों की छतों पर बिना किसी अनुमति और सुरक्षा मानकों के टांगे गए हैं, जिससे किसी भी अनहोनी की स्थिति में बड़ी जनहानि का खतरा बना हुआ है।
खतरे की अनदेखी, प्रशासन की चुप्पी-स्थानीय निवासियों का आरोप है कि शहर में अवैध होर्डिंग्स का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है और प्रशासन इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। गांधी चौक, जय स्तंभ, बुढार चौक में घरों की छतों पर टंगे ये विशालकाय होर्डिंग्स तेज हवा या आंधी में कभी भी गिर सकते हैं, जिससे राहगीरों या नीचे खड़े वाहनों को गंभीर नुकसान हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन तब जागेगा, जब कोई बड़ी दुर्घटना हो जाएगी?
नियमों की धज्जियां, राजस्व का नुकसान-नगरपालिका और जिला प्रशासन द्वारा होर्डिंग्स लगाने के लिए स्पष्ट नियम और दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं। इनमें अनुमति लेना, सुरक्षित स्थान का चयन करना, इंजीनियरिंग जांच करवाना और निर्धारित शुल्क का भुगतान करना शामिल है। हालांकि, शहर में अधिकांश होर्डिंग्स इन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए लगाए गए हैं। इससे न केवल सुरक्षा को खतरा है, बल्कि सरकार को राजस्व का भी भारी नुकसान हो रहा है।
जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग-शहर के जागरूक नागरिक और सामाजिक संगठन लगातार प्रशासन से इस अवैध कारोबार पर लगाम लगाने और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन की इस निष्क्रियता से यह प्रतीत होता है कि उनके कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।
आवश्यक कार्रवाई का इंतजार- अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागेगा और शहर में फैले इस अवैध होर्डिंग्स के जाल को साफ करने के लिए ठोस कदम उठाएगा। नागरिकों की सुरक्षा और शहर की व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान देना आवश्यक है।



