स्थानांतरण घोटाले में बड़ी कार्यवाहीतीन कर्मचारी निलंबित, सहायक आयुक्त को नोटिस

सीधी जबलपुर दर्पण । कलेक्टर द्वारा आदेश जारी कर स्थानांतरण नीति 2025 के निर्देशों का उल्लंघन करने पर आदिम जाति कल्याण विभाग के तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। साथ ही सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है।कलेक्टर द्वारा आदेश जारी कर उमाशंकर दुबे लेखपाल, शिवेंद्र सिंह सहायक ग्रेड 2 एवं विनोद पाठक सहायक ग्रेड 3 आदिम जाति कल्याण विभाग को विभाग प्रमुख को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए गए नियम एवं निर्देशों को संज्ञान में नहीं लाते हुए स्थानांतरण नास्तियां प्रस्तुत कर स्थानांतरण आदेश जारी किए जाने का दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।उल्लेखनीय है कि जनप्रतिनिधियों तथा कर्मचारियों द्वारा की गई शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत /अपर कलेक्टर को जांच सौंपी गई थी। अपर कलेक्टर द्वारा स्थानांतरण हेतु प्रस्तुत नस्तियों तथा दस्तावेजों का अवलोकन कर विस्तृत जांच की गई जिसमें गंभीर अनियमितताएं पाई गईं हैं। उक्त को दृष्टिगत रखते हुए कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं।
इनके स्थानांतरण पर लगें थे आरोप आदिवासी विकास विभाग सीधी द्वारा मनमानी ट्रांसफर को लेकर यह सुर्खियां बनी हुई थी। जिसमें उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लुरघुटी से शिक्षक अरुण कुमार सिंह का स्थानांतरण आदिवासी कन्या शिक्षा परिसर सीधी में आदेश क्रमांक 792, दिनांक 9 जून 2025 के द्वारा किया गया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि बिना शासन के निर्देश के उक्त संस्था में स्थानांतरण करना नियम विरुद्ध है। इसी तरह आदिवासी बालक छात्रावास बकवा से प्राथमिक शिक्षक पंकज सिंह का स्थानांतरण अधीक्षक अनुसूचित जन जाति सीनियर बालक छात्रावास क्रमांक 1 सीधी के लिए किया गया। यह स्थानांतरण राकेश रावत को हटाकर किया गया है। वहीं संकुल केंद्र उमरिया के माध्यमिक शाला से माध्यमिक शिक्षक संदीप कुमार सिंह चौहान का स्थानांतरण आदिवासी जूनियर बालक छात्रावास अमरपुर के अधीक्षक पद पर किया गया है। यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि स्थानांतरित शिक्षक परिवीक्ष अवधि में हैं। इसी तरह शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चिनगवाह की माध्यमिक शिक्षक मधुकला पटेल का स्थानांतरण आदिवासी बालक आश्रम कोचिला के लिए किया गया है। बताया गया है कि अभी एक वर्ष पहले कोचिला अधीक्षिका से हटाकर उन्हें चिनगवाह स्थानांतरित किया गया था। कोचिला में अधीक्षिका के पद पर रहते हुए लगभग 8 से 10 लाख के गबन के आरोप में उन्हें हाटाया गया। श्रीमती पटेल को उच्च न्यायालय जबलपुर से भी फटकार मिली थी कि आप शिक्षकीय कार्य करें। फिर भी आदिवासी विकास विभाग सीधी में न्यायालय के आदेश के बावजूद फिर से इन्हें अधीक्षिका बनाया गया। इन्हीं मामलों को लेकर कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी ने संज्ञान में लेते हुए तत्काल कार्यवाही की है।



