आदिवासी सरपंच बना कठपुतलीः दबंगों का दबदबा

टीकमगढ़ जबलपुर दर्पण । जिले की जनपद पंचायत पलेरा की ग्राम पंचायत महेवा चक्र तीन में लोकतंत्र की असलियत खुलकर सामने आ गई है। यहां चुना तो गया मुन्ना लाल आदिवासी को सरपंच, लेकिन असल में पंचायत चला रहे हैं गांव के दबंग। सरपंच खुद स्वीकार करते हैं कि उन्हें न जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का नाम पता है और न ही यह जानकारी कि पंचायत में कितने काम हुए और कितनी लागत से।
गांव में हालत यह है कि सरपंच महज नाम मात्र का चेहरा हैं, जबकि फैसले दबंगों की चौपाल में तय होते हैं। सरपंच तो खुद अंत्योदय कार्ड धारक हैं, जिनका परिवार रोज़मर्रा की दैनंदिनी चलाने तक में संघर्ष कर रहा है। ऐसे हालात में उनसे पंचायत चलाने की उम्मीद करना बेमानी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में योजनाओं और विकास कार्यों पर दबंगों ने कब्जा जमा रखा है। सरपंच से केवल हस्ताक्षर करवाए जाते हैं और असल निर्णय वही लोग लेते हैं जो ताकतवर हैं।
यह स्थिति न केवल सरपंच की मजबूरी को दिखाती है बल्कि यह भी उजागर करती है कि पंचायत स्तर पर लोकतंत्र पूरी तरह दबंगों के शिकंजे में है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन कब जागेगा? कब यह सुनिश्चित करेगा कि आदिवासी सरपंच को उसका संवैधानिक अधिकार और वास्तविक अधिकार मिले? ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल जांच कर दबंगों पर सख्त कार्रवाई की जाए और पंचायत को लोकतांत्रिक ढर्रे पर चलाया जाए।
इनका कहना है-
आज पंचायत में पत्रकार आने वाले हैं इसकी जानकारी मिली थी और पन्नालाल यादव मास्साब झांसी गए हुए हैं। इसलिए मुझे बुलाया गया है।वही सरपंची चलाते हैं हम सिर्फ दस्तक करते हैं। हमें ज्यादा जानकारी नहीं है। बाकी काम हमारे सचिव व रोजगार सहायक देखते हैं।
मुन्ना लाल सौंर
सरपंच महेवा चक्र तीन।
सरपंच आदिवासी हो या फिर कोई और हम उसको हक और अधिकार दिलाएंगे। सरपंच को भी अपने अधिकारों की जानकारी होना चाहिए।
संजय दुबे
अनुविभागीय अधिकारी जतारा।



