इंदिरा स्कूल में मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे विद्यार्थी

गोटेगांव जबलपुर दर्पण। गोटेगांव नगर में नगरपालिका द्वारा 2 अक्टूबर 1966 को स्थापित इंदिरा कन्या हाईस्कूल आज 59 वर्षों बाद भी शासकीय दर्जे से वंचित है। यह शाला वर्षों से नगरपालिका द्वारा संचालित की जा रही है लेकिन यहां अध्ययनरत छात्राओं को वे सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं जो अन्य शासकीय विद्यालयों में सहज रूप से उपलब्ध हैं। गोटेगांव और आसपास की अनेक छात्राएं इस विद्यालय में शिक्षा अर्जित कर रही हैं। मगर उन्हें न तो पाठ्यपुस्तकों की निशुल्क सुविधा मिलती है न ही पोशाक या छात्रवृत्ति जैसी मूलभूत सहायता। यह स्थिति तब है जब इस शाला को कई बार शासकीय करने का प्रस्ताव शासन तक भेजा जा चुका है। लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। लंबे समय से नगर के नागरिकों और अभिभावकों की ओर से इस शाला को शासकीय करने की मांग उठती रही है विद्यालय में कार्यरत अस्थायी शिक्षिकाओं को मिलने वाला वेतन शाला विकास निधि से प्रदान किया जाता है, जबकि स्थायी शिक्षिकाओं का वेतन नगरपालिका वहन करती है, लेकिन इस अस्थिर व्यवस्था के कारण शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसी विद्यालय के समीप नगरपालिका द्वारा एक नया हॉल और कुछ कमरे बनाए गए हैं, लेकिन उनमें न तो फ र्श डाला गया है और न ही छत की प्लास्टर या छपाई का कार्य पूर्ण हुआ है। इस कारण यह भवन आज तक उपयोग में नहीं आ सका। जबकि इसका उपयोग विद्यालय के लिए अतिरिक्त कक्षाओं या गतिविधियों के लिए किया जा सकता था। विधायक महेन्द्र नागेश ने आश्वासन दिया है कि वे इस शाला को शासकीय दर्जा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र लिखेंगे। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही इस मुद्दे को शासन स्तर पर उठाएंगे।



