सिवनी दर्पण

न्यायालय ने दिखाई सख्ती, लेकिन जिला पंचायत में फाइलें अब भी धूल फांक रही हैं

सिवनी जबलपुर दर्पण । सिवनी में दोहरा मापदंड ऐतिहासिक सज़ा के बावजूद ‘प्रभावशाली , प्रभावशाली दोषियों की फाइलें’ धूल फांक रही हैं ‘कमीशन’ पर विकास का गंभीर आरोप 2 सितंबर 2025: एक तरफ सिवनी का न्यायिक तंत्र भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा प्रहार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले के 8 जनपदों में प्रभावशाली लोगों से जुड़ी भ्रष्टाचार की फाइलें दशकों से धूल फांक रही हैं। यह विरोधाभास प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, जहाँ छोटे मामलों में त्वरित कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े मामलों में निष्क्रियता हावी है।हाल ही में, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश लक्ष्मण कुमार वर्मा ने एक अहम फैसले में ग्राम पंचायत बंधा के तत्कालीन सरपंच बालाराम भलावी और तत्कालीन सचिव वीरेंद्र सिंह राजपूत को 7-7 वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई। इन पर धारा 409 भादवि और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)सी के तहत क्रमशः ₹10,000 का अर्थदंड भी लगाया गया। यह मामला मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरुण त्रिपाठी की शिकायत पर सामने आया था।जांच में यह पाया गया कि वित्तिय वर्ष 2014-2015 में बालाराम भलावी और वीरेंद्र राजपूत ने मिलकर ग्राम पंचायत बंधा के लिए आवंटित ₹1,69,500 की सरकारी राशि का गबन किया। इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष 2013-2014 में सरपंच बालाराम भलावी और सचिव हुकुम सिंह डहेरिया ने ₹11,39,098 की राशि का भी गबन किया था। वहीं, ग्राम पंचायत मकरझिर में वित्तीय वर्ष 2012-2013 और 2013-2014 में तत्कालीन सरपंच प्रेमा बाई वरकड़े और तत्कालीन सचिव वीरेंद्र राजपूत ने ₹20,84,077 का गबन कर शासकीय निधि को खुर्द-बुर्द किया। यह राशि बी.आर.जी.एफ. और पंच परमेश्वर योजना के तहत थी।विकास के दावों पर कमीशन का साया अध्यक्ष श्रीमती मालती मुकेश डेहरिया के क्षेत्र में शून्य विकास
जहाँ एक ओर न्यायालय ने भ्रष्टाचार के इस मामले में सख्त रुख अपनाया है, वहीं दूसरी ओर जिला पंचायत में ही भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी प्रतीत होती हैं। अध्यक्ष श्रीमती मालती मुकेश डेहरिया के निर्वाचन क्षेत्र-15 की 35 ग्राम पंचायतों में विकास के दावों के बावजूद, पिछले 3 वर्षों में स्वयं की निधि से एक भी रुपया नहीं दिया गया है। यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब सूत्रों के अनुसार, यह बात सामने आई है कि जिला पंचायत में दूसरे जनपदों को कमीशन लेकर निधि दी गई है। यह सीधा आरोप है कि विकास का वादा सिर्फ कागजों पर है, और जनता के पैसों का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया जा रहा है।
जनपद पंचायत लखनादौन सिहोरा,गोसाई खमरिया,औरापानी,गणेशगंज, बावली,नागनदेवरी,एवं जनपद पंचायत घंसौर में शिकारा,नयेगांव,कुदवारी,चरगांव जैसी अन्य पंचायतों से जुड़ी भ्रष्टाचार,एवं और राजस्व वसूली की फाइलें लंबे समय से जिला पंचायत कार्यालय में धूल फांक रही हैं। ये मामले दर्शाते हैं कि एक तरफ जहाँ न्यायपालिका सक्रिय है, वहीं प्रशासनिक उदासीनता और कथित कमीशनखोरी ने विकास और न्यायिक प्रक्रिया दोनों को बाधित कर दिया है। सवाल यह है कि जब आम लोगों पर तुरंत कार्रवाई होती है, तो इन प्रभावशाली ‘दोषियों’ की जवाबदेही कब तय होगी और क्या जनता को वास्तव में न्याय मिल पाएगा

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