ग्राम पंचायत मारुड में नलजल योजना में भ्रष्टाचार

पांढुर्णा जबलपुर दर्पण । देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘हर घर नल से जल’ योजना योजना का सपना पांढुर्णा ब्लॉक में जल निगम एवं पीएचई विभाग की लापरवाही के चलते अधूरा रह गया है। ब्लॉक के कई गांवों में चार साल बाद भी ग्रामीण अपने घरों में नलों से पेयजल आने की राह देख रहे हैं। अधिकारियों की मिलीभगत से जल जीवन मिशन यहां पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है।
ऐसा ही मामला पांढुर्णा ब्लाक के मारुड में देखने मिला, जहा नल-जल योजना के तहत ठेकेदार द्वारा पाइप-लाइन बिछाते समय गांवों की सड़कें खोदी गई थीं, लेकिन उनकी मरम्मत अब तक नहीं की गई, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरपंचों और ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं, लेकिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ रही है।
आधी अधूरी योजना-ग्राम पंचायत मारुड में हर घर नल योजना अंतर्गत लगभग 80 लाख से ऊपर की राशी से योजना क्रियान्वयन आधा अधूरा है, फिर भी पंचायत एवम जिम्मेदार अधिकारी मौन है। सरकार द्वारा ग्राम मे नई पाईप-लाईन बिछाकड हर घर मे नल कनेक्शन प्रदाय करने के उद्देश से पाइपलाइन विस्तार का कार्य तो प्रारम्भ हुआ है, किंतु ठेकेदार द्वारा यह कार्य पूरे एक साल से भी अधिक समय से चल रहा है, परन्तु पाइप लाइन विस्तार की अनियमितता को लेकर ग्रामीणों द्वारा 181 पर शिकायत भी की गई है। ठेकेदार द्वारा ग्राम के अनेको हिस्सो मे अभी भी पाईप लाईन नही डाली गई है।वही ग्रामीणों ने बताया कि ठेकेदार ने साल पहले सड़को की खुदाई कर पाईप लाईन बिछाने का कार्य तो किया लेकिन, सड़क से लगी निकासी नालियो को भी तोड़ा गया है, जिसकी मरम्मत नही होने से टूटी नालियों में मलमूत्र का गंदा पाणी रुका हुआ है, जिसके चलते ग्राम में बीमारी फैलने का खतरा भी बड़ गया है, साथ ही आम जनता के आवागमन हेतु मार्ग टूटा पड़ा है जिसके चलते छोटे बच्चो ओर महिलाओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है, जिसका सुधार न हो पाना कही ना कही पंचायत कार्यप्रणाली को उजागर करता है। जिसका जिम्मेदार जंनप्रतिनिधि ओर लापरवाह पंचायत की व्यवस्था है।
पुरानी पाइप-लाइन जर्जर ओर लीकेज-पुराने समय मे पंचायत ने नल कनेक्शन तो दिये है। परन्तु ग्राम मे पूर्व विस्तारित पाईप-लाईन है वह भी कई जगह लिकेज एवं जर्जर अवस्था में है,जिसके चलते पाइप लाइन से लीकेज पानी की नमी के चलते मच्छरों के प्रकोप बढ़ गया है, यही नही तो लीकेज के चलते सप्लाई के समय लीकेज के माध्यम से पाइप-लाइन से नालियों का गंदा पानी भी घर घर पहुच रहा है, अब यह पेयजल न होकर प्रदूषित जल हो चुका है, जिसका जिम्मेदार द्वारा परीक्षण कर जांच हेतु भेजना चाहिए अन्यथा जनता के स्वास्थ पर बुरा असर पड़ सकता है, पूर्व तो लीकेज पाइप का पंचायत द्वारा सुधार करना चाहिए।
पंचायत द्वारा परोसा जा रहा फ्लोराइड युक्त पानी –ग्रामीणों द्वारा प्रशासन से कई बार शिक़ायत करने के बाद जिम्मेदार अधिकारीयो द्वारा पिछले समय जांच के दौरान पाणी में फ्लोराईड की मात्रा पाई गई थी। उसके बाद ग्राम की पेयजल व्यवस्था में जो कोलीखापा बोरवेल का पाणी है, वह पेयजल योग्य नही होना जाच मे बताया गया था, कुछ दिनो तक वह बोरवेल बंद रखा गया, फीर पंचायत ने उसे अचानक पुनः चालु कर ग्राम की पेयजल हेतु उसी पाणी का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में पंचायत की लापरवाही के चलते जनता के स्वास्थ पर बुरा प्रभाव हो सकता है। जल संकट से जूझ रहे दोनों गांवों के लोग काम-धंधा छोड़कर पानी की तलाश में भटकने को मजबूर हैं। गर्मी के दिनों में यह समस्या और गंभीर होने की आशंका है। जनपद के अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस मामले में जवाबदेही लेने को तैयार नहीं हैं और किसी भी सवाल से बच रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन इस मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे और जल जीवन मिशन का लाभ सही मायनों में सभी तक पहुंचाया जाए।



