सीधी दर्पण

5वीं 8वीं बोर्ड परीक्षा में बदलाव, कई विषयों पर होगा विशेष फोकस

सीधी जबलपुर दर्पण । एमपी बोर्ड की 5वीं और 8वीं की वार्षिक परीक्षा के पैटर्न में बदलाव किया जा रहा है। अब लघुउत्तरीय प्रश्नों की संख्या बढ़ाई जा रही है और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों यानी लॉन्ग आंसर वाले प्रश्नों की संख्या कम की जा रही है, जिससे परीक्षार्थियों को सवाल हल करने में सहूलियत हो। इसके साथ ही नई शिक्षा नीति के तहत कई विषय पर खास जोर दिया जा रहा है जैसे खेती, मौसम, जीएसटी, स्वास्थ्य समस्याएं जैसे एचआईवी एड्स आदि। 5वीं, 8वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम का आंकलन अद्र्धवार्षिक परीक्षा, लिखित परीक्षा और प्रोजेक्ट में मिले अंकों के आधार पर किया जाएगा। इसमें अद्र्धवार्षिक परीक्षा के 20 अंक, लिखित परीक्षा के 60 अंक और प्रोजेक्ट के 20 अंक निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक विषय में दीर्घउत्तरीय प्रश्नों की संख्या कम होगी। जबकि इसके बदले अति लघुउत्तरीय और लघु उत्तरीय प्रश्नों की संख्या में बढ़ोत्तरी की जाएगी। 5वीं, 8वीं की वार्षिक परीक्षा के पैटर्न में कुल प्रश्नों की संख्या 26, बहु विकल्पीय प्रश्न 5 प्रश्न प्रत्येक के लिए एक-एक अंक निर्धारित, रिक्त स्थानों की पूर्ति 5 प्रश्न प्रत्येक के लिए एक-एक अंक निर्धारित, अति लघु उत्तरीय प्रश्न 6 प्रश्न प्रत्येक के लिए दो-दो अंक निर्धारित, लघु उत्तरीय प्रश्न 6 प्रश्न प्रत्येक के लिए 3-3 अंक निर्धारित, दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 4 प्रश्न प्रत्येक के लिए 5-5 अंक निर्धारित रहेगा। शिक्षा केंद्र के अनुसार इस बार 5वीं-8वीं की बोर्ड परीक्षा संभवत: फरवरी या मार्च में आयोजित की जाएगी। इसमें दोनों कक्षाओं में 5-5 अंक के चार दीर्घउत्तरीय प्रश्न होंगे, जबकि 6 अति लघु उत्तरीय और 6 लघु उत्तरीय प्रश्न होंगे। ब्रजेश सक्सेना ने बताया कि दोनों ही कक्षा की लिखित परीक्षा 60 अंकों की होगी। इनमें दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की संख्या इसलिए कम की गई है, जिससे यदि परीक्षार्थी दीर्घ उत्तरीय सवाल कम हल कर पाते हैं, तो उसके ज्यादा अंक नहीं कटेंगे।
स्थानीय राजनीति से संबंधित आएंगे सवाल
कक्षा आठवीें के बच्चों को स्थानीय राजनीति की बुनियादी जानकारी देने के लिए महापौर और पार्षद चुनाव की प्रक्रिया और वार्ड से संबंधित समस्याओं पर प्रोजेक्ट बनाना होगा। इस प्रोजेक्ट के बच्चों को 20 अंक मिलेंगे। इसमें विद्यार्थियों को अपने परिजनों और आसपड़ोस के 4 से 5 सदस्यों से चर्चा कर प्रोजेक्ट तैयार करना है। इसमें बच्चों को ग्राम पंचायत के पंच-सरपंच, नगर पंचायत और पालिका के पार्षद व अध्यक्ष के साथ नगर निगमों के पार्षद और महापौर के नाम और उनके काम से संबंधित प्रोजेक्ट बनाना होगा।

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